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दिल्ली/NCR

Delhi Crime Branch Action: दिल्ली में आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़! पाकिस्तान से जुड़े 2 हथियार तस्कर गिरफ्तार, बड़ी साजिश नाकाम

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है. पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े दो हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया है. दावा है कि पकड़े गए आरोपियों का मकसद भारत में अशांति फैलाना था. पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर एक 0.30 बोर की चाइनीज पिस्टल, एक 0.32 बोर का रिवॉल्वर और 11 कारतूस बरामद किए हैं. इसके अलावा हथियारों की तस्करी में इस्तेमाल होने वाली कार भी जब्त की गई है, जिसमें छिपे हुए विशेष खांचे बनाए गए थे.

पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों की पहचान इमरान (37) और मोहम्मद कमरान (27) के रूप में हुई है. दोनों आरोपी अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और आतंकी नेटवर्क के मुख्य सप्लायर के रूप में काम कर रहे थे. दोनों को 2 अप्रैल 2026 को IGI एयरपोर्ट पर लुकआउट सर्कुलर के आधार पर हिरासत में लिया गया, जिसके बाद पूछताछ के बाद उन्हें इस केस में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. अब इन दो नई गिरफ्तारियों के बाद कुल आरोपियों की संख्या 12 हो गई है.

बताया जा रहा है कि पुलिस अब तक 23 अत्याधुनिक विदेशी हथियार और 211 कारतूस बरामद कर चुकी है, जिनमें एक सब-मशीन गन भी शामिल है. मामले की गंभीरता को देखते हुए इस केस में UAPA की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं. जांच में सामने आया है कि इमरान और कमरान, इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड शाहबाज अंसारी के बेहद करीबी हैं. इमरान उसका साला है, जबकि कमरान उसका कजिन है. दोनों पिछले करीब एक साल से इस आतंकी मॉड्यूल के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे थे.

पाकिस्तान से थाईलैंड और नेपाल होते हुए भारत पहुंचते थे हथियार

पुलिस जांच में पता चला है कि इमरान यूपी के सिकंदराबाद का रहने वाला है और अपने भाई के साथ डेयरी का काम करता है, जबकि कमरान बुलंदशहर में चूड़ी की दुकान पर काम करता है. साधारण जिंदगी जीने वाले ये दोनों आरोपी असल में बेहद शातिर तरीके से अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी के नेटवर्क का अहम हिस्सा बने हुए थे. इनका काम नेपाल से आने वाली हथियारों की खेप को रिसीव करना, उसे सुरक्षित तरीके से भारत में लाना, फिर उन्हें जोड़ना और आगे सप्लाई करना था. ये दोनों आरोपी नेटवर्क में लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी का पूरा जिम्मा संभालते थे. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित और हाई-टेक तरीके से काम करता था. हथियारों को पहले पाकिस्तान से मंगाया जाता था, फिर उन्हें थाईलैंड के रास्ते नेपाल पहुंचाया जाता था, ताकि सीधे भारत से कनेक्शन छिपाया जा सके.

कारों में छुपाकर सप्लाई किए जाते थे हथियार

जांच में पता चला है कि नेपाल पहुंचने के बाद हथियारों को अलग-अलग हिस्सों में तोड़ दिया जाता था और फिर आरोपियों द्वारा इन्हें भारत में गैर-कानूनी रास्तों से लाया जाता था. भारत पहुंचने के बाद इन्हें फिर से जोड़कर तैयार किया जाता था और फिर गुप्त ठिकानों पर रखा जाता था. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों में बेहद प्रोफेशनल तरीके से छुपे हुए खांचे (hidden cavities) बनाए जाते थे. ये खांचे इतने चालाकी से बनाए जाते थे कि सामान्य जांच में उनका पता लगाना लगभग नामुमकिन होता था. बरामद की गई मारुति स्विफ्ट कार में भी ऐसे ही खांचे पाए गए हैं.

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा कनेक्शन

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का हाथ है. यह नेटवर्क भारत में अवैध हथियारों की सप्लाई कर आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा था. फिलहाल दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और फरार आरोपी शाहबाज अंसारी की तलाश जारी है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.

शाहबाज अंसारी रच रहा था आतंकी हमले की साजिश

फरार मास्टरमाइंड शाहबाज अंसारी, पाकिस्तान और नेपाल में बैठे हैंडलर्स के साथ सीधा संपर्क रखता था और उन्हीं के निर्देश पर भारत में अपने गुर्गों के जरिए हथियारों की सप्लाई करवाता था. बताया जा रहा है कि हथियारों की बिक्री से मिलने वाला पैसा भी आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाना था. जांच एजेंसियों का मानना है कि ये हथियार किसी बड़े आतंकी हमले के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे. खासतौर पर धार्मिक कार्यक्रमों, त्योहारों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाने की साजिश थी. अगर समय रहते इस नेटवर्क का भंडाफोड़ नहीं होता, तो देश में बड़ी आतंकी घटना हो सकती थी, जिससे जान-माल का भारी नुकसान और सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता था.

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