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Dhamtari News: नगर निगम में ‘वाहन’ पर संग्राम! ई-रिक्शा से दफ्तर पहुंच रहीं महिला सभापति, मेयर ने बताया तंगहाली का नतीजा

धमतरी: नगर निगम में इन दिनों “वाहन” का मुद्दा राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है. महिला सभापति के ई-रिक्शा से निगम कार्यालय आने का मामला अब सत्ता और विपक्ष के बीच बड़ा विवाद बन गया है. विपक्ष ने इसे महिला सम्मान से जोड़ते हुए निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं महापौर ने वाहन खराबी और आर्थिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अलग ही सफाई दी है.

महिला सभापति का आरोप

नगर निगम की सभापति कौशिल्या देवांगन ने बताया कि सामान्य सभा की बैठक के दूसरे ही दिन निगम प्रशासन की ओर से उनसे शासकीय वाहन वापस मांगा गया. उन्होंने कहा कि उपायुक्त ने फोन कर वाहन ले जाने की जानकारी दी और जब बाद में वाहन के बारे में पूछा गया तो उसे खराब बताया गया. सभापति के अनुसार, तब से लगातार वाहन की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक व्यवस्था नहीं हो पाई है, जिसके कारण पिछले एक सप्ताह से उन्हें किराए के ई-रिक्शा से ही दफ्तर आना-जाना पड़ रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि वाहन की स्थिति पहले अच्छी थी.

मेयर की दलील

महापौर रामू रोहरा ने मामले पर अलग पक्ष रखते हुए कहा कि सभापति, महापौर और कमिश्नर तीनों की गाड़ियां वर्तमान में खराब हैं. उन्होंने बताया कि नगर निगम में पहले लगभग 400 लीटर डीजल की खपत होती थी, जिसे घटाकर 200 लीटर तक लाया गया है. महापौर ने कहा कि पेट्रोल पंपों द्वारा नकद भुगतान की व्यवस्था शुरू होने से निगम को दिक्कतें आ रही हैं और आर्थिक दृष्टि से खर्च नियंत्रित करना जरूरी हो गया है. कई वाहनों में लगातार एक से डेढ़ लाख रुपये तक मरम्मत खर्च आ रहा था, इसलिए खराब वाहनों को राइट-अफ करने और निकाय मद से नई गाड़ियों की मांग करने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल किराए की गाड़ी की व्यवस्था या वैकल्पिक वाहन देना संभव नहीं है. पेट्रोल-डीजल खर्च बढ़ने के कारण करीब चार गाड़ियां खड़ी करनी पड़ी हैं.

विपक्ष हमलावर

वहीं नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक सोनकर ने निगम प्रशासन पर हमला बोलते हुए कहा कि सभापति (स्पीकर) को शहर भ्रमण और शासकीय कार्यों के लिए वाहन उपलब्ध कराया जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सभापति के पास 5–6 साल पुरानी बोलेरो थी, जिसे अचानक वापस ले लिया गया और अब उन्हें ऑटो-रिक्शा से आना पड़ रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार नारी सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर महिला पदाधिकारी को हतोत्साहित किया जा रहा है. नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि जल्द वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया तो जोरदार विरोध किया जाएगा.

अब यह मामला नगर निगम की राजनीति में नया विवाद बन चुका है और आने वाले दिनों में इस पर और सियासत तेज होने के आसार है.

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