ब्रेकिंग
Indo MIM IPO: इंडो एमआईएम का 3812 करोड़ का आईपीओ 23 जुलाई से खुलेगा, जानें प्राइस बैंड और पूरी डिटेल Dishani Chakraborty Boyfriend: मिथुन चक्रवर्ती की बेटी दिशानी का ब्राइडल लुक वायरल, खूबसूरती देख दीव... Kids Constipation Remedies: बच्चों में कब्ज की समस्या दूर करेंगे ये 5 फल, पेट साफ होना होगा आसान Kidney Cancer Symptoms: सिर्फ दर्द ही नहीं, शरीर के ये 7 संकेत भी हो सकते हैं किडनी कैंसर का इशारा SpiceJet Acquisition: स्पाइसजेट को खरीदेगी गल्फ एयरलाइन? निवेश और अधिग्रहण को लेकर शुरुआती बातचीत शु... China Floods: चीन के 1 लाख बांध बने मुसीबत, बिना चेतावनी पानी छोड़ने से कई गांवों में भारी तबाही Nepal Coin Map Controversy: नेपाल ने 1 रुपये के सिक्के से हटाया विवादित नक्शा, अब होगी बौद्ध मठ की त... Zohran Mamdani on Netanyahu: क्या अमेरिका में गिरफ्तार होंगे नेतन्याहू? न्यूयॉर्क के मेयर के बयान पर... Campa Cola Market Share: रिलायंस 'कैंपा' ने कोल्ड ड्रिंक बाजार में मचाया तहलका, पेप्सी और कोका-कोला ... UPI Offline Payment: अब बिना इंटरनेट भी होगा यूपीआई पेमेंट, फ्लाइट और मेट्रो में भी कर सकेंगे लेनदेन
हिमाचल प्रदेश

SIA Charge-sheet: व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का बड़ा खुलासा, हमले के लिए ‘TATP’ जैसे घातक विस्फोटक का कर रहे थे इस्तेमाल

स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) कश्मीर ने व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल मामले में 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. एक अधिकारी ने बताया कि एसआईए कश्मीर ने एक महत्वपूर्ण आतंकी साजिश के मामले में चार्जशीट दाखिल की है. इस मामले में एक गुप्त मॉड्यूल शामिल है, जिसे आमतौर पर ‘डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल’ के नाम से जाना जाता है.

10 आरोपियों में से एक, डॉ. उमर उन नबी, पिछले नवंबर में लाल किले पर हुए धमाके में मारा गया था. बाकी नौ आरोपी, आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर उल अशरफ भट, मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद, इरफान अहमद वागे उर्फ ओवैस, जमीर अहमद अहंगर उर्फ मुतलाशी, डॉ. मुज़म्मिल शकील गनई उर्फ मुसैब, डॉ. अदील अहमद राथर उर्फ जावेद, डॉ. शाहीन सईद और तुफैल अहमद भट हैं.

नौगाम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज

सभी 10 आरोपियों के खिलाफ श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था. यह मामला पिछले साल अक्टूबर की एक घटना से जुड़ा है, जब नौगाम इलाके में भड़काऊ और धमकी भरे पोस्टर लगाए गए थे. इन पोस्टरों पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का नाम लिखा था. अधिकारियों ने बताया कि इन पोस्टरों का मकसद जनता में डर फैलाना, सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना और भारत की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता को सीधे तौर पर चुनौती देना था.

सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा

अधिकारी ने कहा कि एक गहन और लगातार जांच से पता चला है कि यह पोस्टर अभियान कोई अलग-थलग घटना नहीं थी बल्कि एक बड़ी और सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा था. इस साजिश का मकसद प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) को फिर से खड़ा करना था. उन्होंने बताया कि आरोपियों ने एक बेहद गुप्त मॉड्यूल बनाया था जो देश में आतंकी हमले करने के लिए लोगों को कट्टरपंथी बनाने, भर्ती करने और ऑपरेशन की तैयारी करने में सक्रिय रूप से शामिल था.

जानबूझकर जेईएम के नाम का इस्तेमाल

उन्होंने कहा कि जांच में यह साबित हुआ कि आरोपियों ने जानबूझकर जेईएम के नाम का इस्तेमाल किया. इसका मकसद जेईएम की बदनामी का फायदा उठाना और लोगों पर मनोवैज्ञानिक असर डालना था जबकि वे गुपचुप तरीके से एजीयूएच को फिर से स्थापित करने और उसकी ऑपरेशनल ताकत बढ़ाने का काम कर रहे थे.

संस्थानों का गलत इस्तेमाल

अधिकारी ने बताया कि इस मॉड्यूल में बेहद पढ़े-लिखे लोग शामिल थे, जिनमें मेडिकल पेशेवर भी थे. इन लोगों ने गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए अपने ज्ञान, पहुंच और संस्थानों का गलत इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि आरोपियों ने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के जरिए सक्रिय रूप से चरमपंथी प्रोपेगैंडा फैलाया और विस्फोटक बनाने से जुड़ी सामग्री जुटाने और प्रायोगिक गतिविधियां की, जिसमें रिहायशी इलाके और अल-फ़लाह मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़ी जगहें भी शामिल थीं.

जांच से पता चला है कि इस ग्रुप ने ट्राईएसीटोन ट्राईपरॉक्साइड’ (टीएटीपी) को अपनी पसंदीदा सामग्री के तौर पर चुना था. यह एक बेहद संवेदनशील और अस्थिर विस्फोटक है, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में कई आतंकी घटनाओं में किया गया है. इसे चुनने की वजह यह थी कि इसके शुरुआती घटक आसानी से मिल जाते हैं.

साजिश का समय रहते पर्दाफाश

इस मॉड्यूल द्वारा विस्फोटक पदार्थों और शुरुआती सामग्रियों को इतनी बड़ी मात्रा में जमा करने की बात से सुरक्षा और जांच एजेंसियों में हड़कंप मच गया. इससे उनके इरादों की गंभीरता, तैयारियों के स्तर और इस बात का पता चलता है कि अगर इस साजिश का समय रहते पता लगाकर इसे नाकाम न किया गया होता, तो इसके कितने भयानक नतीजे हो सकते थे.

अधिकारी ने कहा कि एक व्यापक और सबूतों पर आधारित जांच के जरिए एसआईए ने पूरे आतंकी नेटवर्क और उसके मददगार ढांचे को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया है. उन्होंने बताया कि एसआईए को ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं, जिनमें बरामदगी, डिजिटल फ़ॉरेंसिक, वैज्ञानिक विश्लेषण और गवाहों के बयान शामिल हैं. ये सबूत इस साज़िश में हर आरोपी की मिलीभगत को पूरी तरह से साबित करते हैं.

Related Articles

Back to top button