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Women’s Reservation Bill 2026: लोकसभा में आज वोटिंग, 33% आरक्षण और परिसीमन पर सरकार और विपक्ष में आर-पार; जानें क्या है नंबर गेम

संसद का विशेष सत्र, तीन दिन तक चलना निश्चित हुआ है. आज इस लिहाज से दूसरा दिन है. यहां चर्चा देश की चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलावों पर होगी. सरकार महिला आरक्षण, परिसीमन और चुनावी ढांचे में बदलाव की बात कर रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक कदम बता रहा है. पहले दिन लोकसभा का सत्र शुरू होते ही माहौल गर्म हो गया. कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 पेश करने की प्रक्रिया शुरू की. वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 सदन में रखा. सरकार का कहना है कि ये बदलाव चुनावी व्यवस्था को मजबूत करेंगेलेकिन विपक्ष ने शुरुआत में ही इसका विरोध किया और इसे राजनीतिक कदम बताया.

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना उनका अधिकार है, कोई एहसान नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है. विपक्ष ने भी सरकार के प्रस्तावों पर सवाल उठाए.

सरकार के पास पूरे नंबर नहीं हैं

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है. समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने जनगणना और जाति गिनती का मुद्दा उठाया. उन्होंने पूछा कि जनगणना में देरी क्यों हो रही है. इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जाति के आधार पर भी गिनती की जाएगी. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली

कुल मिलाकर संसद में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच स्पष्ट मतभेद नजर आए. एक तरफ सरकार इसे जरूरी सुधार बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसके समय और तरीके पर सवाल उठा रहा है. करीब 18 घंटे की बहस के बाद अब इस पर आज शाम 4 बजे वोटिंग होनी है. सरकार के पास फिलहाल पूरे नंबर नहीं हैं, लेकिन उसने राज्यों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है. अब देखना होगा कि बिल पास हो पाता है या नहीं और इस बहस का आगे की राजनीति पर क्या असर पड़ता है.

किसके पास कितनी सीटें हैं?

संवैधानिक संशोधन के लिए उपस्थित और वोट देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (जो सदन की कुल 543 सदस्यों वाली क्षमता के आधे से कम न हो) होना जरूरी है. यानी विशेष बहुमत से इसे पारित किया जाएगा. अब सीटों की स्थिति पर नजर डालते हैं. मौजूदा समय में NDA के पास 293 सीटे हैं. जिसमें BJP के पास 240 सीटें + सहयोगी दल के पास 53 सीटें. अब इसमें 360 वोटों के लक्ष्य से 67 वोट कम हैं.

Non-NDA के पास 241 सीटें हैं. यानी कांग्रेस के पास 98 सीटें (सबसे ज़्यादा) + अन्य विपक्षी दल; अगर एकजुट हो जाएं तो संशोधन को रोक सकते हैं. इनमें 7 निर्दलीय सांसद किसी भी गुट में नहीं गिने गए हैं. 541 सीटों वाले सदस्यों की संरचना है. किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए लोकसभा में 360 वोटों की जरूरत होगी, बशर्ते सभी उपस्थित सदस्य वोट दें. BJP के पास 240 सीटें हैं, जो सबसे ज्यादा हैं. NDA की कुल सीटों की संख्या 293 है, जिसमें सात निर्दलीय सांसदों को शामिल नहीं किया गया है. Non-NDA गुट में 241 सदस्य हैं, जिसमें कांग्रेस के पास 98 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है.

16 अप्रैल को सरकार की तरफ से सदन में तीन बिल पेश किए गए, जिसमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 (The Delimitation Bill, 2026) और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 है.

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