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Corporate Jihad: ‘कॉरपोरेट जिहाद’ के लिए कंपनियों को कहां से मिली फंडिंग? NIA की चार्जशीट में होगा बड़ा खुलासा

देश में संदिग्ध आर्थिक नेटवर्क के जरिए देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने की आशंका ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. इसी कड़ी में केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए को नासिक शहर पुलिस द्वारा एक अहम मामले से जुड़े डॉक्यूमेंट सौंपे गए हैं. इन डॉक्यूमेंट के आधार पर एजेंसी ने बेहद गोपनीय तरीके से अपनी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है.

सूत्रो के मुताबिक, यह मामला ‘कॉरपोरेट जिहाद’ से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें कुछ कंपनियों के जरिए संदिग्ध लेन-देन किए जाने का शक है. जांच एजेंसियां अब इन कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड, निवेश के स्रोत और उनके लेन-देन के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं. खासतौर इन कंपनियों में आया पैसा कहां से आया और उसका उपयोग किन गतिविधियों में किया गया, इसे देखा जा रहा है.

विदेशी फंडिंग नेटवर्क से तार जुड़े होने की आशंका

शुरुआती जांच में ये संकेत मिले हैं कि कुछ फर्जी या कागजी कंपनियों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर धन जुटाने के लिए किया जा रहा था. आशंका है कि इसी धन का इस्तेमाल करके देश विरोधी गतिविधियों को वित्तीय समर्थन देने में किया गया हो सकता है. एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि कहीं इन ट्रांजेक्शन्स के तार अंतरराष्ट्रीय संगठनों या विदेशी फंडिंग नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं.

नासिक पुलिस प्रमुख ने कहा था कि हम यह स्पष्ट करना चाहेंगे कि हम इन मामलों में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गहन जांच कर रहे हैं. हमने राज्य खुफिया विभाग (SID), आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को पत्र लिखकर उनका ध्यान और सहयोग मांगा था. जैसे ही हमें कोई सबूत मिलेगा, हम इन पहलुओं के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाएंगे. यौन अपराधों, धर्म परिवर्तन के प्रयासों और कार्यस्थल पर धार्मिक उत्पीड़न के नौ मामलों में से पहला मामला 26 मार्च को एक महिला ने दर्ज कराया था. महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपियों में से एक ने उसे नौकरी दिलाने और शादी करने का वादा करके उसका यौन शोषण किया.

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