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Rohtak News: लावारिस बच्चे को अपनाया और बना दिया अंतरराष्ट्रीय पहलवान, रोहतक के इस परिवार की हर तरफ हो रही तारीफ

रोहतक: खेड़ी साध गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो सिर्फ खेल नहीं, बल्कि इंसानियत की ताकत दिखाती है. एक 6 साल के लावारिस बच्चे को अपनाकर एक परिवार ने उसे सहारा दिया, पालन-पोषण किया. नतीजा ये कि आज वही बच्चा देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत रहा है. एशिया चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर लौटे पहलवान ललित शेरावत का गांव में भव्य स्वागत हुआ.

6 साल की उम्र में छूटा साथ, गुरुकुल से बदली जिंदगी: ललित शेरावत की कहानी संघर्ष से शुरू होती है. बचपन में ही माता-पिता का साया सिर से उठ गया और वो अकेला पड़ गया. करीब 6 साल की उम्र में वो झज्जर के एक गुरुकुल में पढ़ रहा था, लेकिन वहां भी रिश्तेदारों ने खर्च उठाने से मना कर दिया. यहीं उसकी मुलाकात विजय गहलावत से हुई. विजय ने जब ललित की हालत देखी, तो उसे परिवार का सदस्य बनाने का ठाना. विजय ने अपने पिता मास्टर जोगिंदर गहलावत को फोन कर कहा, ‘अब हम दो नहीं, तीन भाई हैं.’ इस एक फैसले ने ललित की पूरी जिंदगी बदल दी.

परिवार ने अपनाया, बेटा बनाकर खड़ा किया: मास्टर जोगिंदर गहलावत ने बिना देर किए ललित को अपने परिवार का हिस्सा बना लिया. खेड़ी साध गांव में उसे सिर्फ छत ही नहीं मिली, बल्कि मां-बाप का प्यार और भाईयों का साथ भी मिला. आज ललित खुद कहता है कि उसका असली घर अब पानीपत का करहंस नहीं, बल्कि रोहतक का खेड़ी साध है. जोगिंदर गहलावत और उनकी पत्नी ही उसके लिए मां-बाप हैं.

ग्रीकोरोमन कुश्ती में चमका नाम: परिवार का सहारा मिला तो ललित ने खेल में अपना दम दिखाया. 55 किलो वर्ग में ग्रीकोरोमन कुश्ती खेलते हुए वो अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया. अब तक वो आधा दर्जन मेडल जीत चुका है. हाल ही में किर्गिस्तान में हुई एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर उसने देश और अपने परिवार का नाम रोशन किया. गांव लौटने पर उसका जोरदार स्वागत किया गया, जहां पूरे गांव ने उसे अपने बेटे की तरह सराहा.

ललित ने बताई अपनी कहानी: ललित ने बचपन के दिनों को याद कर कहा “मेरे ऊपर मां-बाप का साया नहीं था. मेरे चाचा-ताऊ ने मुझे गुरुकुल झज्जर में छोड़ दिया था. कुछ साल बाद उन्होंने खर्च देने से मना कर दिया. वहां मुझे विजय मिला. उसने अपने घर फोन कर दिया कि हमें एक और भाई मिल गया. फिर मैंने कुश्ती सीखनी शुरू की. परिजनों ने पूरा साथ दिया. धीरे-धीरे मेडल आते गए और आज यहां खड़ा हूं.”

भारतीय नौसेना में नौकरी, अब घर और शादी की तैयारी: ललित शेरावत फिलहाल भारतीय नौसेना में हवलदार के पद पर तैनात हैं. वहीं मास्टर जोगिंदर गहलावत अब उसके लिए नया मकान बनाने और शादी की तैयारी में जुट गए हैं. जोगिंदर गहलावत गर्व से कहते हैं कि उनके अब दो नहीं, बल्कि तीन बेटे हैं और तीनों ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान हैं. उनकी कोशिश है कि ललित को हर वो सुख मिले, जो एक बेटे को अपने परिवार से मिलता है.

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