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मध्यप्रदेश

Jabalpur Bargi Dam: मसीहा बनकर आया 22 साल का रमजान; बरगी डैम हादसे में मौत के मुंह से ऐसे बचाई 7 जिंदगियां

कहते हैं आपदा के समय फरिश्ते आसमान से नहीं उतरते, बल्कि हमारे बीच से ही कोई साधारण इंसान ‘देवदूत’ बनकर सामने आता है। जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे में जब चीख-पुकार मची थी, तब जल जीवन मिशन के तहत काम कर रहे मजदूरों ने अपनी जान पर खेलकर इंसानियत की अद्भुत मिसाल पेश की। इस रेस्क्यू ऑपरेशन के सबसे बड़े हीरो बनकर उभरे हैं 22 वर्षीय शेख रमजान, जिन्होंने मौत को चुनौती देते हुए उफनती लहरों से कई जिंदगियां वापस खींच लीं।

ऊंचे टीले से सीधे उफनते पानी में लगा दी छलांग

पश्चिम बंगाल का रहने वाला शेख रमजान जबलपुर में एक वेल्डर के तौर पर काम करता है। हादसे के वक्त जब बरगी डैम में नर्मदा नदी का रौद्र रूप दिख रहा था और क्रूज पलट रहा था, तब रमजान कई फीट ऊंचे टीले पर खड़ा था।

  • खौफनाक था मंजर: नाव आधी डूब चुकी थी और लोग मदद के लिए चीख रहे थे।

  • नहीं डगमगाए कदम: इस खौफनाक मंजर को देखकर रमजान डरा नहीं। उसने बिना अपनी जान की परवाह किए ऊंचे टीले से सीधे पानी में छलांग लगा दी।

  • 7 जिंदगियों का रक्षक: चंद मिनटों के भीतर रमजान ने अपनी बहादुरी से एक के बाद एक 7 लोगों को डूबने से बचा लिया।

शेख रमजान का मानना है कि “जब कोई डूब रहा हो, तो हमारा सबसे पहला काम उसे बचाना है, क्योंकि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।”

वीडियो बनाते वक्त देखा हादसा, ऐसे शुरू हुआ सामूहिक रेस्क्यू

इस खौफनाक हादसे की पहली भनक सतना निवासी क्रेन ऑपरेटर भोला रैकवार को लगी।

  • भोला अपने परिवार को दिखाने के लिए नर्मदा की ऊंची लहरों का वीडियो बना रहा था।

  • जैसे ही उसने क्रूज को डगमगाते और पलटते देखा, उसने तुरंत मोबाइल जेब में रखा और अपने साथियों को मदद के लिए आवाज लगाई।

मजदूरों की फौज बनी संकटमोचक

भोला की आवाज सुनते ही बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश से आए मजदूरों (HF Infra और नेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के कर्मचारी) की एक पूरी टीम एकजुट हो गई।

  • देसी जुगाड़ से रेस्क्यू: रस्सी, टायर और ट्यूब के सहारे इन मजदूरों ने मौत के तांडव के बीच तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया।

  • 17-18 लोगों को निकाला सुरक्षित: परियोजना प्रबंधक आलोक तिवारी के नेतृत्व में इन मजदूरों ने मिलकर करीब 17-18 लोगों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाला और पूरी रात रेस्क्यू में डटे रहे।

  • प्रशासन से पहले तैयार किया रास्ता: सरकारी तंत्र के सक्रिय होने से पहले ही इन मजदूरों ने कटिंग और बैकफिलिंग करके क्रेन के डैम तक पहुँचने का रास्ता बना दिया था।

  • 50-60 मीटर गहरे पानी से निकाला क्रूज: तीन बार रस्सी टूटने के बावजूद, मजदूरों ने हिम्मत नहीं हारी और 50-60 मीटर गहरे पानी में फंसे क्रूज को बाहर खींच लिया। हालांकि, इस दौरान 4 महिलाओं को नहीं बचाया जा सका, जिनके शव मजदूरों ने भारी मन से बाहर निकाले।

सोशल मीडिया पर छाई रमजान की जांबाजी बंगाल से सिर्फ पेट पालने आया यह युवा आज जबलपुर और सोशल मीडिया पर दर्जनों परिवारों का ‘चिराग’ बुझने से बचाने वाले रियल हीरो के रूप में चर्चा का विषय है। रमजान के मुताबिक, लोगों की मदद करके उसे जो सुकून मिला है, वही उसकी सबसे बड़ी कमाई है।

बरगी डैम का यह हादसा जहां सिस्टम की लापरवाही की दास्तां कहता है, वहीं इन ‘गुमनाम नायकों’ ने साबित कर दिया कि जान बचाने के लिए वर्दी और पद की नहीं, बल्कि जिगर और जज्बे की जरूरत होती है।

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