Charkhi Dadri: ऑपरेशन सिंदूर के हीरो मनोहर सिंह फोगाट का निधन, सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

चरखी दादरी: आपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाले हीरो डिप्टी कमांडेंट मनोहर सिंह फोगाट (38) को देश ने खो दिया। आपरेशन के दौरान ही वो बीमार हुए थे और मुंबई के टाटा अस्पताल में पिछले करीब छह माह तक भर्ती रहने के बाद मंगलवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी पार्थिव देह बुधवार दोपहर पैतृक गांव मकड़ाना पहुंची और शाम को गांव में ही सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गई।
⚔️ एनएसजी गोल्ड मेडलिस्ट का अदम्य साहस: उरी में बचाई थी 250 नागरिकों की जान
रिटायर्ड कप्तान दिलबाग सिंह ने बताया कि मनोहर सिंह फोगाट एनएसजी कमांडो के गोल्ड मेडलिस्ट थे। नवंबर 2025 में ‘आपरेशन सिंदूर’ के दौरान वे उरी में बार्डर पर ही तैनात थे। उनकी टीम ने उस दौरान न केवल हाइड्रो पावर प्लांट पर पाकिस्तान द्वारा ड्रोन से किए गए हमलों को नाकाम किया, बल्कि बहादुरी से रेस्क्यू कर 250 नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला। उनके इस अदम्य साहस के लिए उन्हें ‘डायरेक्टर जनरल की डिस्क’ से सम्मानित किया गया था।
🛡️ सैन्य परंपराओं से भरा परिवार: पिता और साले भी सेना के गौरव
डिप्टी कमांडेंट मनोहर सिंह फोगाट का परिवार शुरू से ही देश सेवा के लिए समर्पित रहा है। उनके पिता पारस सिंह फोगाट नेवी से रिटायर्ड मानद कैप्टन (मेजर रिटायर्ड) हैं, जबकि उनके साले सरबजीत सिंह छिल्लर वर्तमान में सेना में कर्नल के पद पर तैनात हैं। मनोहर सिंह ने सीआइएसएफ (CISF) में कमीशन प्राप्त किया था और अपनी कर्तव्यनिष्ठा से विभाग का मान बढ़ाया।
💔 मकड़ाना में शोक की लहर: राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
बुधवार सुबह जैसे ही मनोहर सिंह के निधन की खबर मकड़ाना पहुंची, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। वह अपने पीछे पत्नी प्रियंका और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। अंतिम संस्कार के दौरान भारी संख्या में लोग उमड़े और ‘भारत माता की जय’ व ‘मनोहर सिंह अमर रहें’ के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। सेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी।
✨ विरासत: आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे मनोहर
मनोहर सिंह फोगाट न केवल एक कुशल अधिकारी थे, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और साहस के उदाहरण एनएसजी और सीआईएसएफ में दिए जाते रहेंगे। उरी जैसे संवेदनशील इलाके में ड्रोन हमलों को नाकाम करना और सैकड़ों जिंदगियां बचाना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही। उनकी बहादुरी की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति की एक बड़ी प्रेरणा बनी रहेगी।






