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मध्यप्रदेश

Bhopal News: भोपाल में 77 लाख की सरकारी इलेक्ट्रिक कारें हुईं कबाड़, ऊर्जा विकास निगम में धूल फांक रहे वाहन

Bhopal News: मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। करीब आठ साल पहले सरकारी उपयोग और ई-मोबिलिटी को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से खरीदी गई सात इलेक्ट्रिक कारें अब अनुपयोगी होकर ऊर्जा विकास निगम के दफ्तर परिसर में खड़ी-खड़ी खराब हो रही हैं। इन वाहनों की खरीद पर वर्ष 2017-18 में लगभग 77 लाख रुपए खर्च किए गए थे।

🔌 ईईएसएल के जरिए हुई थी खरीद: वीआईपी सेवा में भी तैनात रहीं गाड़ियां

जानकारी के अनुसार, इन इलेक्ट्रिक कारों को टाटा मोटर्स के मॉडलों के रूप में Energy Efficiency Services Limited (EESL) की मदद से खरीदा गया था। इनका उद्देश्य सरकारी विभागों में ईवी के उपयोग को बढ़ावा देना और ईंधन खर्च में कमी लाना था। सूत्रों के मुताबिक, कुछ वाहन तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्य सचिव (सीएस) और प्रमुख सचिव (पीएस) स्तर के अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए थे। हालांकि, कुछ समय बाद सभी वाहन वापस लौट आए और तब से उनका उपयोग बंद है।

🔋 बैटरी बदलने का भारी खर्च: 5 लाख की लागत ने रोके पहिए

इन कारों के रखरखाव में कई तकनीकी और आर्थिक चुनौतियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि सबसे बड़ी समस्या बैटरी बदलने की थी, जिसकी लागत प्रति वाहन लगभग 4 से 5 लाख रुपए बताई गई। इसके अलावा पुराने मॉडलों के स्पेयर पार्ट्स और सर्विस सपोर्ट की उपलब्धता भी सीमित हो गई, जिससे वाहन लंबे समय तक निष्क्रिय पड़े रहे। बिना इस्तेमाल और देखभाल के अब ये गाड़ियां कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर हैं।

🗣️ मंत्री विश्वास सारंग का बयान: मुख्यमंत्री के निर्देशों का दिया हवाला

मामले पर प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि जहां संभव हो, वहां सरकारी वाहनों के उपयोग के जरिए बचत की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ईवी को बढ़ावा देने के लिए पहले भी कई पहल की हैं। हालांकि, संबंधित वाहनों की वर्तमान स्थिति की उन्हें तत्काल जानकारी नहीं है, लेकिन वे इस पर संज्ञान लेंगे कि आखिर क्यों इन वाहनों का परिचालन रुक गया।

⚖️ विपक्ष के निशाने पर सरकार: जीतू पटवारी ने खर्चे और नीति पर उठाए सवाल

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि बचत के कई तरीके होते हैं और केवल पेट्रोल की खपत कम करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकारी खर्चों और फिजूलखर्ची पर भी कटौती की जरूरत बताई। यह मामला सरकारी खरीद, रखरखाव योजना और ईवी नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन की पोल खोल रहा है कि कैसे बिना दूरगामी योजना के सरकारी धन का निवेश किया गया।

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