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दिग्विजय का मोदी सरकार पर हमला, बोले- NRC की जगह बेरोजगारों का रजिस्टर बनाना चाहिए

नई दिल्ली। देश में मौजूदा बेरोजगारी दर को लेकर केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) के बजाय ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ एजुकेटेड अनइंप्लॉयड इंडियंस सिटीजन’ तैयार करने का सुझाव दिया।

कांग्रेस नेता ने नेशनल नेशनल रजिस्टर ऑफ एजुकेटेड अनइंप्लॉयड इंडियंस सिटीजन को ‘एकीकृत एजेंडा’ और एनआरसी को ‘विभाजनकारी एजेंडा’ करार दिया। उन्होंने ट्वीट करके कहा, ‘हमारे पास हमारे पीएम के लिए एक बहुत ही सकारात्मक सुझाव है। एनआरसी जो पूरे देश में सामाजिक अशांति का कारण बना है उसके बजाय उन्हें ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ एजुकेटेड अनइंप्लॉयड इंडियंस सिटीजन’ तैयार करना चाहिए। लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि यह एक विभाजक एजेंडा नहीं होगा! यह एक एकीकृत एजेंडा होगा।’

केंद्र पर हमलावर कांग्रेस

बता दें कि कांग्रेस बेरोजगारी, आर्थिक मंदी, नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और एनआरसी को लेकर केंद्र पर हमलावर रही है। इसे लेकर एक बार फिर दिग्विजय सिंह ने सरकार पर निशाना साधा है।

सीएए पर देशभर में घमासान

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून 2019 (सीएए) का बिल पिछले महीने दिसंबर में पास हुआ। इसे लेकर देश में प्रदर्शन हो रहा है। इस कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों को नगारिकता देने का प्रावधान है, जो सताए जाने के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हैं। इसे लेकर पूरे देश में घमासान छीड़ा हुआ है। विपक्ष ने इस कानून को मुस्लिमों के खिलाफ बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि विपक्ष इसे लेकर लोगों को गुमराह कर रहा है। इस कानून में केवल नागरिकता देने का प्रावधान है। इससे किसी की नगारिकता पर कोई खतरा नहीं है।

विपक्ष का दावा, एनआरसी की ओर पहला कदम होगा एनपीआर 

वहीं सरकार ने जनगणना 2021 के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट कराने का निर्णय लिया है। यह अप्रैल से सितंबर 2020 तक होगा। इसके लिए 13 हजार करोड़ रुपये की सरकार ने मंजूरी दी है। इसका काफी विरोध हो रहा है। विपक्ष इसे एनआरसी की ओर पहला कदम बता रहा है। कहा जा रहा है कि इसका इस्तेमाल एनआरसी बनाने के लिए होगा। केंद्र ने विपक्ष के इन आरोपों को झूठा बताया है। अवैध प्रवासियों से भारतीय नागरिकों को अलग करने के उद्देश्य से विकसित किया गया एनआरसी असम में लागू किया गया था। एनआरसी नागरिक रजिस्टर है। इसके तहत देश के प्रत्येक नागरिक के नाम दर्ज करने का प्रावधान है। असम में हुए एनआरसी में 19 लाख लोगों का नाम नहीं था।

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