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Dhar Bhojshala Case Update: राजा भोज से हाईकोर्ट तक, जानें भोजशाला विवाद की पूरी टाइमलाइन

इंदौर: करीब एक हजार साल पुराने इतिहास, धार्मिक दावों, पुरातात्विक साक्ष्यों और कानूनी बहसों के केंद्र में रहा भोजशाला विवाद (Bhojshala Dispute) अब निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। इंदौर हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई में एएसआई (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट, संस्कृत शिलालेख, स्थापत्य अवशेष, वाग्देवी प्रतिमा और पूजा-नमाज व्यवस्था सबसे अहम मुद्दे बनकर उभरे हैं। हिंदू पक्ष जहां इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है, वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बता रहा है।

⏳ राजा भोज से अदालत तक: विवाद की संक्षिप्त टाइमलाइन

भोजशाला का इतिहास और विवाद सदियों पुराना है। इसकी मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं:

  • 1010-1055: राजा भोज का शासनकाल और सरस्वती सदन का निर्माण।

  • 1875: खुदाई में वाग्देवी प्रतिमा मिलने का दावा (जो वर्तमान में लंदन में है)।

  • 1909: परिसर को पहली बार संरक्षित स्मारक घोषित किया गया।

  • 2003: मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की व्यवस्था लागू हुई।

  • 2024: हाई कोर्ट के आदेश पर एएसआई द्वारा 98 दिनों का वैज्ञानिक सर्वे।

  • 2026: हाई कोर्ट में नियमित सुनवाई और अंतिम फैसले की प्रतीक्षा।

🔍 एएसआई सर्वे के बड़े खुलासे: क्या मिला 2000 पन्नों की रिपोर्ट में?

हाई कोर्ट के आदेश पर एएसआई ने 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया। 10 वॉल्यूम में पेश की गई रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं:

  • परिसर में 106 स्तंभ और 82 पिलास्टर मिले हैं, जिनका संबंध मंदिर संरचना से बताया गया है।

  • सर्वे में 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत शिलालेख मिले हैं, जो अरबी-फारसी लेखों से पुराने हैं।

  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान ढांचे के निर्माण में पूर्ववर्ती मंदिर शैली की सामग्री और नक्काशीदार पत्थरों का उपयोग हुआ है।

  • वैज्ञानिक तकनीकों और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) के जरिए परमारकालीन विशाल संरचना के प्रमाण मिले हैं।

🪔 वाग्देवी प्रतिमा और 2003 की व्यवस्था: विवाद के मुख्य बिंदु

विवाद का एक बड़ा हिस्सा मां वाग्देवी की प्रतिमा है, जिसे 19वीं सदी में ब्रिटिश अधिकारी इंग्लैंड ले गए थे। हिंदू संगठन इसे वापस लाने की मांग करते रहे हैं। इसके अलावा, 2003 से लागू वह व्यवस्था विवाद की धुरी बनी हुई है, जिसके तहत अलग-अलग दिनों में पूजा और नमाज की अनुमति है। विशेषकर तब, जब वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ते हैं, तो प्रशासन के लिए सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाती है।

⚖️ कानूनी लड़ाई का आधार: ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका

वर्ष 2022 में ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ और भोज उत्सव समिति ने हाई कोर्ट में नई याचिका दायर की। इसमें मांग की गई कि परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को वैज्ञानिक आधार पर तय किया जाए। इसी याचिका के बाद एएसआई सर्वे का रास्ता साफ हुआ। अब अदालत के सामने एएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट और दोनों पक्षों के ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिनके आधार पर यह तय होगा कि इस ऐतिहासिक स्थल का भविष्य और धार्मिक अधिकार किसके पक्ष में होंगे।

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