Korea News: भूख और बीमारी से जूझ रहा बचरा पोड़ी का ये परिवार, अपाहिज युवक और बीमार मां के पास इलाज के पैसे नहीं

कोरिया: जिले के ग्राम पंचायत बचरा पोड़ी तोलगा से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक गरीब परिवार भूख, बीमारी और आर्थिक तंगी के बीच जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा है। परिवार का इकलौता कमाने वाला युवक आज चारपाई पर अपाहिज हालत में पड़ा है, जबकि घर की महिलाएं और बच्चे भी गंभीर परेशानियों से गुजर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी दयनीय स्थिति के बावजूद अब तक इस परिवार तक सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों नहीं पहुंच पाया।
🤕 घर का सहारा बिस्तर पर: पेड़ से गिरकर 31 वर्षीय दीपक हुआ अपाहिज
जानकारी के अनुसार, बचरा पोड़ी तोलगा निवासी 31 वर्षीय दीपक लगभग 25 दिन पहले जंगल में चार तोड़ने पेड़ पर चढ़ा था। इसी दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह सीधे नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना गंभीर था कि उसकी कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह काम करना बंद कर चुका है। हादसे के बाद से दीपक बिस्तर पर पड़ा है और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गया है, जिससे परिवार के सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया है।
🏥 बीमारियों का घेरा: बूढ़ी मां और पत्नी भी गंभीर रोगों की शिकार
दीपक के अपाहिज होने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में उसकी बूढ़ी मां लालों बाई हैं, जो खुद गंभीर त्वचा रोग से पीड़ित हैं और ठीक से चल-फिर भी नहीं पातीं। वहीं दीपक की पत्नी सतना (28 वर्ष) डायबिटीज की मरीज है। आर्थिक तंगी के कारण परिवार के पास इलाज तो दूर, दवा खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। पूरा परिवार इस समय शारीरिक और मानसिक पीड़ा के दौर से गुजर रहा है।
👁️ मासूमों पर भी मार: नेत्र रोग से पीड़ित बेटा, पहचान पत्र न होने से योजनाओं से वंचित
इस परिवार में दो छोटे बच्चे भी हैं—10 वर्षीय बेटी रश्मि और 6 वर्षीय पुत्र जीतराम। बताया जा रहा है कि जीतराम नेत्र रोग से पीड़ित है और उसे तत्काल इलाज की जरूरत है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पहचान संबंधी जरूरी दस्तावेज (Aadhaar Redacted) न बन पाने के कारण यह परिवार कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है। दस्तावेजों की कमी इनके लिए सरकारी सहायता प्राप्त करने में बड़ी बाधा बनी हुई है।
🚫 सिस्टम की नाकामी: राशन के भरोसे कट रही जिंदगी, सरपंच ने झाड़ा पल्ला
ग्रामीणों का कहना है कि परिवार की हालत इतनी खराब है कि वे सुशासन तिहार में जाकर अपनी समस्या तक नहीं रख पाए। परिवार को अब तक महतारी वंदन योजना, वृद्धा पेंशन, विकलांग पेंशन और आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिला है। जब इस संबंध में गांव की सरपंच राम कुंवर से चर्चा की गई तो उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि “हमें जानकारी नहीं थी, कोई बताएगा तभी पता चलेगा।”
🤝 मदद की गुहार: प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता और इलाज की मांग
अब पूरा गांव जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही दीपक के इलाज की व्यवस्था, पेंशन योजनाओं का लाभ और बच्चों के पहचान संबंधी दस्तावेज बनवाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाए। ग्रामीण महिला अंजना लकड़ा और पड़ोसी मुन्ना लाल ने प्रशासन से इस बेबस परिवार की सुध लेने की भावुक अपील की है।






