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CBI Action on Builders: घर खरीदारों से धोखाधड़ी मामले में CBI का बड़ा एक्शन; SBI अफसरों और मंजू जे होम्स पर चार्जशीट

नई दिल्ली/गाजियाबाद: घर खरीदने वालों के साथ होने वाली धोखाधड़ी और रियल एस्टेट सेक्टर के बड़े घोटालों से जुड़े एक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक अहम सफलता हासिल की है। सीबीआई ने बिल्डरों और बैंक अधिकारियों के बीच चल रही गहरी सांठगांठ का बड़ा पर्दाफाश किया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सिलसिले में केंद्रीय एजेंसी ने मैसर्स मंजू जे होम्स इंडिया लिमिटेड (M/s Manju J Homes India Limited), कंपनी के निदेशकों और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कुछ तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ अदालत में अपनी नौवीं चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित एक बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहां आरोपियों पर वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ अपनी गाढ़ी कमाई लगाने वाले भोले-भाले घर खरीदारों के साथ भी बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने का संगीन आरोप है।

💼 बिल्डर और बैंक अफसरों ने मिलकर रची थी आपराधिक साजिश: नियमों को ताक पर रखकर पहुंचाया गया गैर-कानूनी वित्तीय लाभ

CBI द्वारा की गई गहन जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि बिल्डर कंपनी और उसके निदेशकों ने बैंक अधिकारियों और कुछ अन्य निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर एक सोची-समझकर आपराधिक साजिश रची थी। आरोप है कि उन्होंने झूठे वादों, लुभावने विज्ञापनों और गुमराह करने वाली जानकारियों के जरिए घर खरीदने वालों और आम निवेशकों को जाल में फंसाया और इस तरह गैर-कानूनी तरीकों से करोड़ों रुपये का गलत वित्तीय लाभ कमाया। जांच में आगे यह भी खुलासा हुआ कि स्टेट बैंक के कुछ अधिकारियों ने तय बैंकिंग नियमों, ऋण प्रक्रियाओं और गाइडलाइंस का सरेआम उल्लंघन करते हुए अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग किया। इन अधिकारियों ने बिल्डर की गैर-कानूनी और संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के बजाय उसमें सक्रिय रूप से मदद की। इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि बैंकिंग संस्थानों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और सैकड़ों घर खरीदारों की जीवनभर की पूंजी डूब गई।

⚖️ आरोपियों पर IPC की कई गंभीर धाराओं के तहत तय हुए आरोप: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी केस दर्ज

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोप पत्र तैयार किया है। इनमें मुख्य रूप से आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने, आपराधिक विश्वासघात (Breach of Trust), दस्तावेजों की जालसाजी और जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने की धाराएं शामिल की गई हैं। इसके अलावा, सरकारी बैंक के अधिकारियों की संलिप्तता के कारण भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान, केंद्रीय एजेंसी ने बड़ी मात्रा में डिजिटल, दस्तावेजी और मौखिक सबूत इकट्ठा किए हैं, जिनसे फंड के गलत इस्तेमाल (Diversion of Funds), आधिकारिक पद के दुरुपयोग और धोखाधड़ी की इस बड़ी कॉर्पोरेट साजिश की पूरी तरह से पुष्टि होती है।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पूरे देश में ऐसे 50 मामलों की जांच कर रही है CBI: आम नागरिकों के हक के लिए एजेंसी प्रतिबद्ध

CBI के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने जानकारी देते हुए बताया कि एजेंसी इस समय देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे कुल 50 बड़े मामलों की सघन जांच कर रही है, जिनमें धोखाधड़ी और फंड के गलत इस्तेमाल के कारण हजारों घर खरीदने वाले और मध्यवर्गीय परिवार प्रभावित हुए हैं। ये सभी संवेदनशील मामले देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के कड़े निर्देशों और निगरानी के बाद दर्ज किए गए थे। इससे पहले भी एजेंसी कई बड़ी डिफॉल्टर रियल एस्टेट कंपनियों और उनके प्रमोटर्स व निदेशकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह आर्थिक अपराधों, बैंकिंग भ्रष्टाचार और आम जनता के साथ होने वाली धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और जवाबदेही तय करने के प्रति अपनी पूरी प्रतिबद्धता दोहराती है, खासकर उन मामलों में जिनका सीधा असर देश के आम नागरिकों के हितों पर पड़ता है।

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