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Sukrawar Ke Niyam: शुक्रवार को महिलाएं क्यों नहीं खाती हैं खट्टी चीजें? जानें इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

नई दिल्ली: हिंदू धर्म और वैदिक शास्त्रों में सप्ताह के हर एक दिन को किसी न किसी विशेष देवी-देवता की आराधना के लिए समर्पित किया गया है। इसी कड़ी में शुक्रवार का पावन दिन धन, ऐश्वर्य, सुख और वैभव की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी का माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु पूरे विधि-विधान और पवित्रता के साथ माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और कई लोग वैभव लक्ष्मी का व्रत भी रखते हैं। पौराणिक मान्यता है कि जो भी भक्त शुक्रवार के दिन पूरी श्रद्धा से मां लक्ष्मी की पूजा और व्रत करते हैं, उन पर मां की विशेष अनुकंपा बरसती है। मां लक्ष्मी की कृपा से भक्तों का घर हमेशा धन-धान्य से भरा रहता है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसी दिन को लेकर सनातन परंपरा में यह बात दृढ़ता से कही जाती है कि शुक्रवार को विशेषकर महिलाओं को खट्टी चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

🍯 माता लक्ष्मी को अति प्रिय हैं मीठी चीजें: पूजा और व्रत के दौरान इमली, नींबू और अचार जैसी चीजों से परहेज करना क्यों है जरूरी?

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, धन की देवी माता लक्ष्मी को सौम्य और मीठी चीजें (जैसे खीर, मिश्री, सफेद मिठाइयां) अति प्रिय हैं। यही कारण है कि इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने के लिए घरों और मंदिरों में लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ ‘कुमकुमर्चना’ (कुमकुम से विशेष अर्चन) की जाती है। शास्त्रों में कहा गया है कि मां लक्ष्मी के साधना काल या शुक्रवार के दिन खट्टी चीजें खाना या खट्टे भोजन का प्रयोग करना बेहद अशुभ और वर्जित माना गया है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो अगर महिलाएं इस दिन इमली, नींबू, आम का अचार, सिरका और संतरे जैसे अत्यधिक खट्टे खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करते हुए व्रत या पूजा करती हैं, तो मां लक्ष्मी उनसे बहुत जल्द प्रसन्न हो जाती हैं और उनकी दरिद्रता दूर करती हैं।

🧬 खट्टे पदार्थों का सेवन माना जाता है नकारात्मकता का प्रतीक: संतोषी माता के व्रत से भी जुड़ा है खट्टा न खाने का यह नियम

धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो शुक्रवार के दिन जानबूझकर खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन करना मां लक्ष्मी के सात्विक स्वभाव के विपरीत होने के कारण उनका अनादर माना गया है। ऐसा माना जाता है कि तामसिक या अत्यधिक खट्टा भोजन करने से शरीर और मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का सुचारू प्रवेश नहीं हो पाता और आलस्य बढ़ता है। व्रत रखने का मूल संबंध भी इसी आंतरिक शुद्धि से जुड़ा हुआ है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखें तो व्रत रखने से हमारे पाचन तंत्र और शरीर का शुद्धिकरण (Detoxification) होता है, जबकि धार्मिक रूप से व्रत हमारे मन को भगवान के प्रति एकाग्र और झुकाव की ओर ले जाता है। इसके अलावा, शुक्रवार को ही वैभव लक्ष्मी के साथ-साथ संतोषी माता की पूजा करने वाली महिलाओं को भी खट्टा खाने से सख्त परहेज करने के लिए कहा जाता है, क्योंकि संतोषी माता के व्रत में खट्टा खाना पूरी तरह निषेध है।

🌸 नियमों के पालन से महिलाओं को मिलता है विशेष सौभाग्य का लाभ: शीघ्र विवाह और अखंड सौभाग्य के लिए अचूक हैं ये उपाय

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शुक्रवार के दिन घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर शुद्ध घी का दीपक जलाने, माता रानी को सफेद मिठाई या मखाने की खीर का भोग लगाने और खट्टी चीजों से पूरी तरह दूरी बनाए रखने से पूजा का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। इस नियमबद्ध साधना से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी भक्तों की सभी मनोकामनाएं चुटकियों में पूर्ण कर देती हैं। विशेष रूप से महिलाओं द्वारा इस नियम का पालन करने से उन्हें दीर्घायु वैवाहिक जीवन (अखंड सौभाग्य), अविवाहित कन्याओं को शीघ्र और सुयोग्य वर की प्राप्ति, परिवार के सदस्यों को उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मक ईश्वरीय प्रभाव का सीधा लाभ मिलता है, जिससे घर की कलह हमेशा के लिए शांत हो जाती है।

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