Balodabazar: बारनवापारा में जंगली गौर (बायसन) का आतंक; हमले में एक ग्रामीण की मौत, दो गंभीर रूप से घायल

बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा अभ्यारण्य क्षेत्र से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के जंगलों में अचानक एक बेकाबू जंगली गौर (Indian Bison) ने ग्रामीणों पर जानलेवा हमला बोल दिया। इस अचानक हुए हमले में एक ग्रामीण की इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जंगली गौर के हमले में गजराडीह गांव के रहने वाले 45 वर्षीय देवेंद्र साहू गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए थे। घटना के तुरंत बाद सहमे ग्रामीणों ने उन्हें आपातकालीन उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन घावों की गंभीरता के चलते इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पूरे गजराडीह गांव में मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। डॉक्टरों के मुताबिक, अन्य दो घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
💰 वन विकास निगम ने पीड़ित परिवार को थमाई ₹25,000 की तत्काल सहायता: शासन के नियमानुसार मिलेगी पूरी क्षतिपूर्ति
दिल दहला देने वाली इस घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और प्रशासनिक अमले के संबंधित उच्च अधिकारी तुरंत सक्रिय हो गए। वन विकास निगम रवान परियोजना परिक्षेत्र के अधिकारियों ने बिना किसी देरी के पीड़ित परिवार से मुलाकात की और ढांढस बंधाया। विभाग द्वारा त्वरित राहत कदम उठाते हुए मृतक देवेंद्र साहू के परिवार को अंतिम संस्कार व तात्कालिक खर्चों के लिए ₹25,000 की नकद सहायता राशि मौके पर ही प्रदान की गई। इसके साथ ही, वन परिक्षेत्राधिकारी ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ शासन के पुनर्वास और मुआवजा नियमानुसार, मृतक के आश्रित परिवार को देय पूरी निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि (मुआवजा) सभी कागजी प्रक्रियाएं पूरी कर जल्द से जल्द उपलब्ध करा दी जाएगी।
📢 “जंगल जाते समय बरतें विशेष सावधानी”—वन मंडल अधिकारी धम्मशील गणवीर ने ग्रामीणों से की सतर्क रहने की अपील
इस दुखद हादसे के बाद वन मंडल अधिकारी (DFO) धम्मशील गणवीर ने स्थानीय मीडिया को बताया कि वन विभाग लगातार संवेदनशील सीमावर्ती गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) से बचाव और आत्मरक्षा के संबंध में जागरूक कर रहा है। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्रों के भीतर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करने और वन्यजीवों की निगरानी के लिए लगातार गश्त (पेट्रोलिंग) के प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग ने कड़े शब्दों में ग्रामीणों से भावुक अपील की है कि वे वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए घने जंगल क्षेत्रों में अकेले जाने से पूरी तरह बचें, विशेष सावधानी बरतें और विभाग द्वारा समय-समय पर जारी सुरक्षा गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करें।
🍃 तेंदूपत्ता सीजन के कारण जंगलों में बढ़ी इंसानी दखल: आवास बदलने और मानवीय गतिविधियों से बढ़े आमने-सामने के हमले
स्थानीय जानकारों और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बारनवापारा और उसके आसपास के बफर जोनों में हाल के दिनों में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही प्रकार के वन्यजीवों की सक्रियता काफी बढ़ गई है। वर्तमान में क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण (Tendu Patta Season) का सीजन चल रहा है, जिसके कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण अलसुबह और देर शाम तक जंगलों के भीतर तक दाखिल हो रहे हैं। जंगलों में इंसानों की बढ़ती इसी अत्यधिक आवाजाही और प्राकृतिक आवासों में आ रहे बदलावों के कारण वन्यजीवों और इंसानों का आमना-सामना (Encounter) अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है, जो इस तरह की हिंसक घटनाओं का मुख्य कारण बन रहा है।
😰 पूरे इलाके में पसरा खौफ और दहशत का माहौल: ग्रामीणों ने वन विभाग से जंगल में नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की
देवेंद्र साहू की मौत और दो ग्रामीणों के घायल होने की इस खौफनाक घटना के बाद से बारनवापारा के आसपास के दर्जनों गांवों में भारी दहशत और खौफ का माहौल बना हुआ है। लोग अब अपने मवेशियों को चराने और दैनिक कार्यों के लिए खेतों की ओर जाने से भी कतराने लगे हैं। अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के आला अधिकारियों से मांग की है कि प्रभावित रिहायशी इलाकों से सटे जंगल क्षेत्रों में वनकर्मियों की नियमित गश्त और नाइट विजन कैमरों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए, साथ ही हिंसक हो चुके गौर को आबादी वाले रास्तों से दूर खदेड़ने के लिए अतिरिक्त और ठोस सुरक्षा उपाय किए जाएं।






