J&K Highway Project: कटड़ा से कुलगाम तक बनेगा नया 4-लेन हाईवे कॉरिडोर; DPR के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू

श्रीनगर/जम्मू: जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और रणनीतिक सड़क संपर्क को अभूतपूर्व मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन ने एक बेहद बड़ी व दूरगामी पहल शुरू की है। श्री माता वैष्णो देवी मंदिर के मुख्य आधार शिविर कटड़ा को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले से सीधे जोड़ने के लिए प्रस्तावित शानदार 4-लेन हाईवे कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की आधिकारिक प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। इस अत्यंत महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य जम्मू संभाग और कश्मीर घाटी के कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में हर मौसम में निर्बाध, सुरक्षित और तेज आवागमन सुनिश्चित करना तथा समग्र क्षेत्रीय विकास को नई गति देना है।
📋 राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण ने शुरू की टेंडर प्रक्रिया: 22 जून 2026 तक जमा होंगी डीपीआर की बोलियां
इस मेगा प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के उद्देश्य से आधिकारिक तौर पर टेंडर आमंत्रित किए हैं। विभाग से प्राप्त ताजा जानकारी के अनुसार, इस ओपन टेंडर प्रक्रिया के तहत इच्छुक कंसल्टेंसी कंपनियों के लिए बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि 22 जून 2026 निर्धारित की गई है। इस डीपीआर के अंतर्गत प्रस्तावित 4-लेन हाईवे की तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) और आर्थिक उपयोगिता का गहन अध्ययन किया जाएगा। इसमें व्यापक ट्रैफिक सर्वे, आधुनिक सैटेलाइट मार्ग अलाइनमेंट योजना, जटिल इंजीनियरिंग डिजाइन, पुल-सुरंगों की आवश्यकता और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन शामिल रहेगा।
🗺️ कटड़ा से कुलगाम तक का प्रस्तावित रूट मैप: रियासी, माहोर और गुलाबगढ़ के रास्ते मुगल रोड का बनेगा सशक्त विकल्प
यह प्रस्तावित 4-लेन हाईवे कॉरिडोर कटड़ा से शुरू होकर रियासी, माहोर और गुलाबगढ़ के ऊंचे पहाड़ी दर्रों से गुजरते हुए कश्मीर घाटी के नंदीमर्ग और आगे कुलगाम तक सीधा रास्ता बनाएगा। यह नया सुगम मार्ग न केवल सर्दियों में बंद हो जाने वाली मौजूदा ऐतिहासिक ‘मुगल रोड’ का एक बेहतरीन और आधुनिक विकल्प बनेगा, बल्कि जम्मू और कश्मीर घाटी के बीच पूरे साल चालू रहने वाला एक नया, सुरक्षित और अधिक सक्षम वैकल्पिक सड़क संपर्क (Alternative Road Connectivity) भी देश को उपलब्ध कराएगा। रक्षा और नागरिक दोनों ही दृष्टिकोणों से इस परियोजना को सुदूरवर्ती इलाकों को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
🏔️ दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के आर्थिक विकास को मिलेगा नया आयाम: यात्रा के समय में आएगी भारी कमी
प्रस्तावित 4-लेन हाईवे जिस भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरेगा, वह जम्मू संभाग के सबसे दुर्गम, ऊंचे और अब तक विकास की मुख्यधारा से अपेक्षाकृत कटे हुए पर्वतीय इलाकों में शामिल है। रियासी, माहोर, गुलाबगढ़ और नंदीमर्ग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वर्तमान सड़क कनेक्टिविटी अभी भी मौसम के मिजाज, भारी बर्फबारी और भूस्खलन जैसी भौगोलिक परिस्थितियों पर पूरी तरह निर्भर है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस आधुनिक 4-लेन मार्ग के पूर्ण रूप से बन जाने के बाद इन सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा के समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और वर्षभर बिना किसी बाधा के सुगम आवाजाही संभव हो सकेगी, जिससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला में बड़ा सुधार होगा।
🏞️ थमेगा नहीं पर्यटकों का कारवां, हर मौसम में आवाजाही का लक्ष्य: जम्मू-कश्मीर की नई लाइफलाइन बनेगा यह एक्सप्रेसवे
सरकारी रणनीतिकारों का दृढ़ विश्वास है कि इस नए हाईवे के निर्माण से पूरे क्षेत्र में साहसिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन (Eco-Tourism) को बहुत बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। कटड़ा से लेकर दक्षिण कश्मीर तक फैले इस संपूर्ण पहाड़ी क्षेत्र में अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य, हरी-भरी वादियां और सांस्कृतिक महत्व के कई ऐसे अनछुए स्थल हैं, जो बेहतर सड़क संपर्क के अभाव में अब तक पर्यटकों की पहुंच से दूर थे। इस मार्ग के चालू होने से स्थानीय होमस्टे, छोटे उद्योग, हस्तशिल्प और सेब-केसर जैसे कृषि उत्पादों की बड़े बाजारों तक पहुंच बेहद आसान हो जाएगी। इस परियोजना की मुख्य इंजीनियरिंग डिजाइन का लक्ष्य ही यही है कि सर्दियों में भारी बर्फबारी या बारिश में बड़े भूस्खलन के बावजूद भी यह मार्ग कभी बंद न हो और क्षेत्र की लाइफलाइन बनकर हमेशा संचालित रहे।






