RG Kar Case: आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर नगर निगम का बड़ा एक्शन; अवैध घर गिराने का आदेश

कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (RG Kar Hospital) के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कोलकाता नगर निगम (KMC) ने वित्तीय भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद संदीप घोष के बेलेघाटा स्थित निजी आवास की छत के एक हिस्से को अवैध घोषित करते हुए उसे तुरंत गिराने का आधिकारिक आदेश जारी किया है। नगर निगम का आरोप है कि भवन का यह विशिष्ट हिस्सा बिना किसी प्रशासनिक इजाजत या स्वीकृत नक्शे के बनाया गया है। घर के ओरिजिनल और स्वीकृत डिजाइन में इस अतिरिक्त हिस्से का कोई जिक्र नहीं था। निगम की विशेष विंग ने संदीप घोष के घर जाकर कंस्ट्रक्शन का विस्तृत इंस्पेक्शन (निरीक्षण) किया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है। नगर निगम ने इसके लिए 45 दिनों की अंतिम समय-सीमा तय की है।
⚖️ बेलेघाटा के बदन रॉय लेन वाले आवास पर नियमों का उल्लंघन: वित्तीय भ्रष्टाचार के मामले में पहले ही जेल काट रहे हैं पूर्व प्रिंसिपल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संदीप घोष वर्तमान में आरजी कर अस्पताल में हुए बड़े वित्तीय भ्रष्टाचार (Financial Corruption Case) के एक मामले में न्यायिक हिरासत के तहत जेल की सजा काट रहे हैं। उन्हें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पुख्ता सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया था। नगर निगम द्वारा जारी किए गए आधिकारिक नोटिफिकेशन में स्पष्ट कहा गया था कि बेलेघाटा के बदन रॉय लेन में स्थित संदीप घोष के मकान के तीन हिस्से बिना प्रशासनिक अनुमति के बनाए गए हैं, जिनमें से मुख्य हिस्से को ध्वस्त करना होगा। संदीप घोष और संगीता घोष पर बदन रॉय लेन (मकान नंबर 83) में ‘बिल्डिंग रूल्स 2009’ के सेक्शन 133 और 134 का खुला उल्लंघन करने का गंभीर आरोप है। नगर निगम ने सरकार के एक सदस्य से मिली लिखित शिकायत के आधार पर इस मामले की आंतरिक जांच की थी।
🏢 नोटिस में केएमसी ने अवैध निर्माण की दी पूरी डिटेल: छत पर 5.425 स्क्वायर मीटर का एरिया और लोहे की सीढ़ी पाई गई गैर-कानूनी
इस मामले की प्रशासनिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 30 अक्टूबर, 2024 को कोलकाता नगर निगम की तरफ से संदीप घोष के घर पर एक आधिकारिक नोटिस तामील कराया गया था। निगम के वरिष्ठ इंजीनियरों ने मौके पर जाकर पूरे भवन की नपाई की थी। नोटिस के मुताबिक, संदीप घोष के घर की छत पर 5.425 स्क्वेयर मीटर एरिया में बनी एक कंक्रीट कवरिंग को पूरी तरह गैर-कानूनी और बिना मंजूरी के बनाया हुआ पाया गया। इस अवैध हिस्से की कुल ऊंचाई 2.05 मीटर है। इसके अतिरिक्त, एक खास मशीन रूम तक जाने के लिए छत पर नियमों को ताक पर रखकर लोहे की घुमावदार सीढ़ी लगाई गई है तथा तीसरी मंजिल पर दरवाज़े के ठीक सामने नई ईंट की दीवार खड़ी की गई है। मूल नक्शे में इस एक्स्ट्रा कंस्ट्रक्शन का कोई कानूनी रिकॉर्ड दर्ज नहीं था, जिस पर निगम ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
⏱️ सुनवाई के बाद मिला 45 दिनों का अल्टीमेटम: आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल ने खुद भी मानी थी अवैध निर्माण हटाने की बात
नगर निगम मुख्यालय में इस अवैध निर्माण को लेकर हुई आधिकारिक ट्रिब्यूनल सुनवाई में घर के मालिक (संदीप घोष का पक्ष) और शिकायत करने वाले दोनों ही पक्ष मौजूद थे। उस दौरान जेल जाने से पहले मालिक पक्ष ने दो महीने के अंदर उस अवैध ढांचे को स्वयं हटा लेने की लिखित सहमति जताई थी। लेकिन तय समय में ऐसा न होने के बाद अब नगर निगम ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंतिम ऑर्डर जारी कर दिया है कि उस हिस्से को आगामी 45 दिनों के अंदर पूरी तरह से मलबे में तब्दील कर दिया जाए। निगम ने यह भी साफ किया है कि अगर किसी को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत इस आदेश पर कोई कानूनी एतराज है, तो वह नगर निगम के अपीलीय न्यायाधिकरण में नई शिकायत या अपील दर्ज करा सकता है।
🩺 आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर केस से जुड़ा है नाम: भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की गिरफ्त में हैं संदीप घोष
मालूम हो कि आरजी कर अस्पताल में एक ऑन-ड्यूटी महिला डॉक्टर के साथ हुए जघन्य रेप और मर्डर की वीभत्स घटना के समय संदीप घोष ही अस्पताल के मुख्य सुपरिटेंडेंट व प्रिंसिपल के पद पर काबिज थे। इस पूरी दर्दनाक घटना के बाद सबूतों से छेड़छाड़ करने और पूरे मामले को दबाने के प्रयासों को लेकर उनके रोल पर देशव्यापी सवाल उठे थे। चारों तरफ बढ़ते भारी जनाक्रोश और डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के बीच संदीप घोष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच में जुटी सीबीआई ने उनके खिलाफ अस्पताल में हुए वित्तीय घोटाल्याें और रेप-मर्डर केस की आपराधिक साजिश में शामिल होने के अलग-अलग मामले दर्ज किए। दोनों ही संगीन मामलों में सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें तकनीकी तौर पर रेप-मर्डर केस में अदालत से बेल मिल गई, लेकिन वित्तीय भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में वे अभी भी कोलकाता की जेल में बंद हैं।






