Jalandhar Petrol Price: जालंधर में फिर आम आदमी को झटका; पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, देखें ताजा रेट्स

जालंधर: पंजाब के जालंधर शहर समेत पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर तगड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे सीधे तौर पर आम लोगों की मासिक जेब और रसोई के बजट पर गहरा असर पड़ना पूरी तरह से तय माना जा रहा है। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत में 1.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 1.78 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा हो गया है। जालंधर में आज से लागू हुए नए रेट के अनुसार, अब पेट्रोल की कीमत बढ़कर 102.23 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई है, जबकि डीजल का भाव 92.10 रुपये प्रति लीटर हो गया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर परिवहन (ट्रांसपोर्ट) और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
📈 16 मई के बाद यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी: लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से जरूरी सामानों पर मंडराया महंगाई का खतरा
बता दें कि इससे पहले भी बीते 16 मई को ईंधन की कीमतों में एक बड़ी और रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली थी, जब सरकारी तेल कंपनियों द्वारा वैश्विक बाजार के अनुसार किए गए बदलावों के बाद पंजाब के कई प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई थीं। आर्थिक विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए चेतावनी दी है कि ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी का देश की आंतरिक अर्थव्यवस्था पर एक व्यापक और नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे थोक परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी इजाफा होगा, जिसके परिणामस्वरूप आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले ज़रूरी सामानों, फल-सब्जियों और अन्य नागरिक सेवाओं पर महंगाई का दबाव आने वाले दिनों में और ज्यादा बढ़ सकता है।
🌐 वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में उतार-चढ़ाव मुख्य वजह: आयात लागत की भरपाई के लिए सरकार ने बताया जरूरी
हालांकि, इस मूल्य वृद्धि पर सफाई देते हुए केंद्रीय और सरकारी तेल अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती आयात लागत की भरपाई करने के लिए इन घरेलू दामों में बदलाव करना बेहद जरूरी हो गया था। वैश्विक कच्चे तेल के बाज़ारों में लगातार जारी भारी उतार-चढ़ाव तथा दुनिया के कई हिस्सों में बने हुए गंभीर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के बीच देश के भीतर ईंधन की आपूर्ति में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था। बहरहाल, तेल की इस लगातार बढ़ती कीमतों ने आम नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है।






