Petrol Diesel Price News: पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने की मांग; CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

नई दिल्ली: देश भर में आम जनता की जेब पर एक बार फिर महंगाई की तगड़ी मार पड़ी है। बीते महज 8 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 बार बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। इस लगातार हो रही मूल्यवृद्धि के कारण देश के कई प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें तो 23 मई को यहां पेट्रोल की कीमतें बढ़कर 99.51 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई हैं। ईंधन की इन बेतहाशा बढ़ती कीमतों के बीच चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी है। सीटीआई ने पेट्रोल और डीजल को तुरंत वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी (GST) के दायरे में लाने की वकालत की है। चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस गंभीर मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक आधिकारिक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि जनता को इस भारी महंगाई से तत्काल राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल को अविलंब जीएसटी स्लैब में शामिल किया जाए।
📊 भारी-भरकम एक्साइज ड्यूटी और वैट की मार झेल रहा है ईंधन: दिल्ली में ₹99.51 के पेट्रोल में करीब ₹28 सिर्फ सरकारी टैक्स
चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, आम उपभोक्ताओं को मिलने वाला पेट्रोल और डीजल इस वक्त भारी-भरकम टैक्स के बोझ तले दबा हुआ है। उन्होंने दिल्ली के टैक्स स्ट्रक्चर का उदाहरण देते हुए आंकड़ों के जरिए समझाया कि 22 मई तक के आधिकारिक डेटा के मुताबिक दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल का वास्तविक (बेस प्राइस) मूल्य महज 66.29 रुपये था। लेकिन इस वास्तविक कीमत पर केंद्र सरकार द्वारा 11.90 रुपये की एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और दिल्ली सरकार द्वारा 16.03 रुपये का वैट (VAT) वसूला जाता है, जबकि पेट्रोल पंप डीलर का मार्जिन कमीशन 4.42 रुपये प्रति लीटर तय है।
यानी उपभोक्ता की जेब पर करीब 32 से 33 रुपये का अतिरिक्त भार केवल टैक्स और डीलर मार्जिन के रूप में पड़ रहा है। इसी तरह डीजल की बात करें तो दिल्ली में इसका वास्तविक मूल्य 67.36 रुपये है, जिस पर 7.80 रुपये एक्साइज ड्यूटी और 13.39 रुपये वैट लगता है, जबकि डीलर का मार्जिन 3.03 रुपये है। यहां भी लगभग 24 रुपये केवल टैक्स और कमीशन के हैं। बृजेश गोयल का कहना है कि यदि पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी लागू कर दिया जाए तो ये तमाम विसंगतिपूर्ण टैक्स समाप्त हो जाएंगे और पूरे देश में केवल एक पारदर्शी टैक्स प्रणाली काम करेगी।
🧮 समझिए ₹22 कमी का पूरा गणित: अगर ईंधन पर लगा 18 फीसदी GST, तो ₹78.22 लीटर पर आ जाएगा पेट्रोल
सीटीआई के आर्थिक दावों के अनुसार, यदि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो अकेले पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 22 रुपये की बड़ी बचत सीधे आम आदमी को हो सकती है। इसका सीधा मतलब यह है कि जो पेट्रोल वर्तमान में 100 रुपये के करीब बिक रहा है, वह घटकर सीधे 78 रुपये प्रति लीटर पर आ सकता है। आइए इसके गणित और कैलकुलेशन को विस्तार से समझते हैं:
दिल्ली में पेट्रोल की वर्तमान कीमत – 99.51 रुपये
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पेट्रोल का वास्तविक मूल्य (बिना टैक्स) – 66.29 रुपये
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केंद्र सरकार का उत्पाद शुल्क – 11.90 रुपये
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दिल्ली सरकार का वैट – 16.03 रुपये
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डीलर का कमीशन मार्जिन – 4.42 रुपये
इस आधिकारिक कैलकुलेशन के तहत 99.51 रुपये के कुल मूल्य में लगभग 28 रुपये का हिस्सा केवल दोहरे टैक्सों का है। यदि जीएसटी काउंसिल पेट्रोल पर 18 फीसदी का टैक्स स्लैब निर्धारित करती है, तो बिना टैक्स वाले 66.29 रुपये के बेस प्राइस पर 18% की दर से कुल जीएसटी टैक्स केवल 11.93 रुपये बनेगा। इस स्थिति में डीलर मार्जिन को जोड़कर भी पेट्रोल की अंतिम कीमत घटकर लगभग 78.22 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। यानी सीधे तौर पर प्रति लीटर दाम में करीब 22 रुपये की भारी गिरावट आएगी, जिससे बाजार में माल ढुलाई सस्ती होगी और चौतरफा महंगाई कम होगी।
🌐 राज्यों की मनमानी से प्रभावित हो रही है ‘वन नेशन वन टैक्स’ की मूल भावना: एक्साइज ड्यूटी और वैट खत्म करने की वकालत
बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने पत्र में देश की टैक्स प्रणाली की विसंगतियों को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि साल 2017 में जब देश में ऐतिहासिक ऐतिहासिक जीएसटी कानून लागू किया गया था, तब केंद्र सरकार ने पूरे देश में ‘वन नेशन वन टैक्स’ (एक देश, एक कर) का नारा दिया था। तब यह संकल्प दोहराया गया था कि देश के भीतर हर आवश्यक वस्तु पर एक समान टैक्स की दरें होंगी और राज्य दर राज्य कीमतें नहीं बदलेंगी।
लेकिन आज पेट्रोल और डीजल के मामले में सभी राज्य सरकारें अपनी वित्तीय जरूरतों के हिसाब से मनमाने तरीके से भारी वैट वसूल रही हैं। यही वजह है कि भारत के अलग-अलग राज्यों और पड़ोसी शहरों में भी पेट्रोल-डीजल की दरों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। सीटीआई के मुताबिक, ईंधन पर अलग-अलग टैक्स वसूलने की यह नीति ‘वन नेशन वन टैक्स’ की मूल अवधारणा पर सीधा कुठाराघात है। इसलिए समय की मांग है कि पेट्रोल-डीजल पर लागू केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी और राज्यों के वैट को पूरी तरह से विलोपित कर इन्हें तत्काल प्रभाव से जीएसटी काउंसिल के अधीन लाया जाए, ताकि पूरे देश में ईंधन की दरें न केवल एक समान हों बल्कि देश के मध्यम वर्ग को तेल की बढ़ती आग से स्थायी राहत मिल सके।






