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रक्षा क्षेत्र में सुधारों का सैन्य विशेषज्ञों ने किया स्वागत, कहा- आयात को कम करने में मिलेगी मदद

नई दिल्ली। सैन्य विशेषज्ञों ने रक्षा क्षेत्र में घोषित सुधारों का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन घोषणाओं का सही तरह से क्रियान्वयन हुआ तो हथियारों व अन्य सैन्य उपकरणों का आयात बिल कम करने में मदद मिल सकती है। एफडीआइ की सीमा को 74 प्रतिशत करने से लॉकहीड माíटन, बोइंग और एयरबस जैसी बड़ी कंपनियां भारत में कारखाना लगाने के लिए प्रोत्साहित होंगी। कंपनियां नई टेक्नोलॉजी भारत में लाने में भी नहीं हिचकिचाएंगी, क्योंकि भारत में उनकी सब्सिडियरी पर भी उनकी ही निर्णायक हिस्सेदारी रहेगी।

हमें रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना होगा

भारत पिछले कई साल से सैन्य उपकरणों के बड़े आयातकों में शुमार है। ऐसे में देश में ही इनके निर्माण को बढ़ावा देने से आयात कम करने में मदद मिलेगी। पूर्व सेना प्रमुख (रिटायर्ड) एनसी विज ने कहा, ‘कोई भी हमें तब तक अपनी टेक्नोलॉजी नहीं देगा, जब तक हम उन्हें ग्लोबल मार्केट में बेचने के लिए उत्पादन करने की सुविधा नहीं देंगे।

सुरक्षा के मोर्चे पर चुनौतियों से निपटने के लिए हमें बहुत पैसों की जरूरत है। साल दर साल आवंटन बढ़ाते रहना हल नहीं है। हमें उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना होगा।’ लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सुब्रत साहा ने कुछ हथियारों एवं प्लेटफॉर्म के आयात पर प्रतिबंध को सबसे अहम एलान माना। पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड) फली मेजर ने आयुध फैक्ट्री बोर्ड के कॉरपोरेटाइजेशन के फैसले का स्वागत किया। इस 200 साल पुराने संगठन के तहत देशभर में 41 आयुध फैक्टि्रयां संचालित होती हैं।

रक्षा उत्‍पादन में FDI में बढ़ोत्तरी

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड का निगमीकरण कर उनके कामकाज में सुधार के लिए किया जाएगा। कंपनियों को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाएगा। रक्षा उत्‍पादन में ऑटोमैटिक रूट्स के जरिए FDI की सीमा को 49 से बढ़ाकर 74 फीसद किया जाएगा। उन्होंने रक्षा उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पर बल दिया। सरकार ऐसे हथियारों एवं प्लेटफॉर्म की लिस्ट अधिसूचित करेगी, जिनके आयात को प्रतिबंधित किया जाएगा।

इस लिस्ट में शामिल हथियारों एवं प्लेटफॉर्म को देश से खरीदा जाएगा। इससे रक्षा उत्पादों के आयात पर आने वाले खर्च में कमी लाने में मदद मिलेगी। सरकार ऑर्डिनेंस फैक्टरी की स्वायत्ता, जवाबदेही और क्षमता को बेहतर बनाने के लिए ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड का कॉरपोरेटाइजेशन किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कॉरपोरेटाइजेशन बोर्ड का निजीकरण नहीं बल्कि कॉरपोरेटाइजेशन किया जाएगा।

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