ब्रेकिंग
Jharkhand Health Department: रिम्स में मेडिकल एडमिशन में अनियमितता; स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर C... Car Fire Incident NH-33: हजारीबाग से रांची जा रही कार में अचानक लगी आग; परिवार के चार सदस्य सुरक्षित Jharkhand Health News: अवैध नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड सेंटर्स पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का ... Garhwa Monsoon Update: गढ़वा में अब तक 'जीरो' बारिश; खेती के लक्ष्य को लेकर कृषि विभाग चिंता में Jharkhand Politics: राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक पारा; भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आमने-सामने भाजप... Jharkhand News: मुहर्रम जुलूस को लेकर प्रशासन सख्त; डीजे पर प्रतिबंध, ड्रोन से निगरानी और CRPF की तै... Jharkhand Jobs News: स्वास्थ्य विभाग में बड़ी नियुक्तियां; 56 फूड सेफ्टी ऑफिसर और 151 विशेषज्ञ डॉक्टर... Sports Promotion Ranchi: रांची रेल मंडल शुरू करेगा चेस, फुटबॉल और वॉलीबॉल अकादमी; नि:शुल्क प्रशिक्षण... Jamtara School Raid: स्कूल के बरामदे में बैठकर ग्राहकों को लूट रहे थे साइबर अपराधी, पुलिस ने रंगे हा... Bhilai News: स्मार्ट मीटर के खिलाफ भड़के लोग; बिजली कार्यालय में मीटर फेंककर किया जोरदार प्रदर्शन
मध्यप्रदेश

MP Board Result Scam: 12वीं की छात्रा को मिले थे मात्र 3 अंक, रिचेकिंग में बढ़े 60 अंक; बोर्ड की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के देवास जिले के कमलापुर से सामने आए एक मामले ने माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board) की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। कक्षा 12वीं की छात्रा पलक चौहान को अंग्रेजी विषय की थ्योरी परीक्षा में 80 में से मात्र 3 अंक दिए गए थे। छात्रा के आत्मविश्वास और मेहनत के सामने जब यह परिणाम आया, तो वह टूट गई थी।

📝 रिचेकिंग से खुला लापरवाही का सच

ग्राम डिगोद की निवासी पलक चौहान ने अपनी मेहनत पर भरोसा रखते हुए रिचेकिंग (पुनर्मूल्यांकन) के लिए आवेदन किया। जब दोबारा परिणाम घोषित हुआ, तो हर कोई हैरान रह गया। पलक के अंकों में 60 अंकों का भारी उछाल आया और उसे 80 में से 63 अंक प्राप्त हुए। इस बड़े अंतर ने स्पष्ट कर दिया कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में न केवल लापरवाही हुई, बल्कि अंकों को जोड़ने में भी बड़ी गड़बड़ की गई थी।

⚖️ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली पर आक्रोश

इस मामले ने उन हज़ारों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है, जो बोर्ड की कार्यप्रणाली के कारण कम अंक मिलने पर मानसिक अवसाद का शिकार हो जाते हैं या दोबारा परीक्षा देने को मजबूर होते हैं। पलक चौहान का मामला तो केवल एक उदाहरण है, जो मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों और बोर्ड की उस प्रक्रिया पर सवाल उठाता है जहाँ एक छात्र के अंकों में 60 अंकों का अंतर आ जाता है।

संपादकीय टिप्पणी: क्या माध्यमिक शिक्षा मंडल को उन शिक्षकों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करनी चाहिए जिनकी लापरवाही के कारण छात्र का कीमती समय और आत्मविश्वास दांव पर लग जाता है? अपने विचार नीचे कमेंट्स में साझा करें।

Related Articles

Back to top button