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छत्तीसगढ़

Jashpur Police Action: ड्यूटी से गायब रहना पड़ा भारी; जशपुर में 3 आरक्षक बर्खास्त, 2 को कठोर दंड

जशपुर पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता और कार्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर डीआईजी डॉ. लाल उमेद सिंह ने कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। विभागीय जांच में लंबे समय तक अनाधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के दोषी पाए गए तीन आरक्षकों को सेवा से पृथक कर दिया गया है, जबकि दो अन्य आरक्षकों को कठोर विभागीय दंड से दंडित किया गया है।

⚖️ बर्खास्तगी का आधार और जांच

पुलिस रेगुलेशन के नियम 221(अ) के तहत 29 मई 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का लगातार उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ यह कदम उठाया गया है। बर्खास्त किए गए आरक्षकों का सेवा रिकॉर्ड अत्यंत निराशाजनक रहा है:

  • संतोष कुमार राम: 13 वर्षों में 469 दिन की गैरहाजिरी।

  • नेल्सन तिग्गा: 17 वर्षों में 923 दिन की गैरहाजिरी।

  • अशोक कुमार एक्का: 20 वर्षों में 1151 दिन की गैरहाजिरी।

🚫 अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं: डीआईजी

डीआईजी डॉ. लाल उमेद सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोपरि है। कर्तव्य के प्रति उदासीनता और स्वेच्छाचारिता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि जनता की सुरक्षा के लिए समर्पित इस विभाग में अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने वालों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

📉 दो आरक्षकों को मिला कठोर विभागीय दंड

अनुशासनहीनता के अन्य मामलों में, आरक्षक इरीमियस कुजूर की वेतन वृद्धि में कटौती (संचयी प्रभाव से) की गई है, जबकि आरक्षक बिंदेश्वर राम को एक वर्ष के लिए न्यूनतम वेतनमान पर लाने का दंड दिया गया है। इन आरक्षकों के सेवा रिकॉर्ड में दर्ज बार-बार की गई गलतियों और अनुपस्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिसका असर उनकी भविष्य की पेंशन और वेतन वृद्धि पर भी पड़ेगा।

संपादकीय टिप्पणी: वर्दीधारी बलों में अनुशासन ही वह आधार है जिस पर कानून-व्यवस्था टिकी होती है। क्या आपको लगता है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से पुलिस बल की कार्यक्षमता और जनता का विभाग के प्रति विश्वास बढ़ेगा? अपने विचार नीचे साझा करें।

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