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TMC Crisis 2026: ममता बनर्जी की TMC में सबसे बड़ी बगावत; 58 विधायकों के साथ ऋतब्रत बनर्जी ने ठोका ‘असली तृणमूल’ का दावा

पश्चिम बंगाल में लगातार 15 साल तक एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) चुनाव में शिकस्त खाने के बाद से लगातार गहरे संकट में घिरी हुई है. हालात यह हो गए हैं कि साल 1998 में बनी ममता की यह पार्टी आज अपने सबसे बड़े अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है. विधानसभा चुनावों में बीजेपी (BJP) से करारी हार का सामना करने के बाद, पार्टी अब इतिहास की अपनी पहली सबसे बड़ी खुली बगावत से जूझ रही है. संकट के इस अभूतपूर्व दौर में पार्टी के भीतर एक ऐसा बड़ा वर्ग भी तैयार हो गया है जो पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ वफादार लोग खुलकर ममता बनर्जी के साथ होने का दावा कर रहे हैं. ममता की पार्टी में जब एक के बाद एक आंतरिक संकट गहरा रहे हैं, तो इसका एक सबसे चर्चित हिस्सा अजीब तरह से खामोश दिख रहा है और वो है फिल्मी सितारों से सजी टीएमसी की ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’. पार्टी के गठन के बाद से ही ममता बनर्जी ने सिनेमा, टेलीविजन और खेल की दुनिया से जुड़ी हस्तियों पर जमकर भरोसा किया था और इन लोगों ने पार्टी की चुनावी और पब्लिक इमेज को लगातार चमकाए रखा था.

🤫 4 मई के नतीजों के बाद टॉलीवुड ब्रिगेड ने साधी चुप्पी, ममता के ‘ग्लैमर कार्ड’ पर भारी पड़ी राजनीतिक हार

टीएमसी के गठन के महज 3 साल बाद ही 2001 में हुए राज्य के विधानसभा चुनाव में ममता ने तत्कालीन मुख्यमंत्री और सीपीआईएम (CPI-M) के दिग्गज नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य के खिलाफ जादवपुर सीट से अनुभवी अभिनेत्री माधबी मुखर्जी को मैदान में उतारा था. ममता अपनी फायर ब्रांड छवि के साथ-साथ इन ग्लैमरस चेहरों के साथ अपनी सियासत आगे बढ़ाती चली गईं और उन्हें इसका बड़ा फायदा भी हुआ. उन्होंने बड़ी संख्या में एक्टर, डायरेक्टर, सिंगर और खिलाड़ियों को चुनावी मैदान में उतारा और इनमें से ज्यादातर सांसद और विधायक भी बने. हालांकि, खालिस राजनीति करने वाले जमीनी नेता हमेशा से ममता के इन फिल्मी सितारों के प्रति नरम और झुके हुए रूख को लेकर खफा रहते थे, लेकिन उन्होंने डर के मारे कभी खुलकर शिकायत नहीं की.

लेकिन अब यही ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’ 4 मई को पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद से पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है. पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में पार्टी में मची इस ऐतिहासिक बगावत के बाद भी यह पूरी ब्रिगेड शांत ही दिख रही है. सियासी गलियारों में यह कयास भी तेज हैं कि इसके कई बड़े सदस्यों ने या तो खामोशी का चोला ओढ़ लिया है या फिर वे पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा पर नए सिरे से विचार करने में जुट गए हैं.

🎬 टीएमसी में रहा है टॉलीवुड का बड़ा दबदबा, बॉलीवुड से लेकर खेल जगत के दिग्गज भी थे शामिल

टीएमसी की टॉलीवुड ब्रिगेड में शताब्दी रॉय, मून मून सेन, संध्या रॉय, जून मालिया और दिवंगत तापस पॉल जैसे बड़े नाम शामिल रहे हैं. इनके अलावा दीपक अधिकारी (जिन्हें देव के नाम से जाना जाता है), मिमी चक्रवर्ती, नुसरत जहां, रचना बनर्जी, सायंतिका बनर्जी, सयानी घोष, सोहम चक्रवर्ती, हिरन चटर्जी, कंचन मल्लिक, कौशानी मुखर्जी और मशहूर डायरेक्टर राज चक्रवर्ती भी इस कुनबे का अहम हिस्सा रहे हैं. राजनीति के अलावा ममता ने कला और संस्कृति जगत से जुड़े बड़े कलाकारों जैसे इंद्रनील सेन, विदेश बोस और जोगेन चौधरी को भी अपने साथ जोड़ा था. वहीं, बॉलीवुड सिंगर से नेता बने बाबुल सुप्रियो, पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, कीर्ति आजाद और मनोज तिवारी के साथ-साथ डिप्लोमैट-लेखक पवन वर्मा जैसी बड़ी राष्ट्रीय हस्तियों को भी टीएमसी के टिकट पर संसद और विधानसभा भेजा गया था.

🤐 मुखर रहने वाली सांसद सयानी घोष खामोश, महुआ मोइत्रा और ब्रत्या बसु भी सार्वजनिक मंचों से गायब

टीएमसी के कई सेलिब्रिटीज अपनी मुखरता और सोशल मीडिया सक्रियता के लिए जाने जाते हैं, जिनमें युवा सांसद सयानी घोष सबसे चर्चित नाम हैं. वह 2021 के चुनावों के दौरान पार्टी में शामिल हुई थीं. हर मुद्दे पर बेबाक राय रखने वाली सयानी ने भी ऋतब्रत बनर्जी की बगावत के मसले पर पूरी तरह रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है. चुनाव नतीजों के तुरंत बाद, उन्हें कालीघाट में एक आपातकालीन बैठक में देखा गया था, जहां उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में उन्हें ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई किसी भी कोर कमेटी की बैठक या धरने के कार्यक्रम में नहीं देखा गया है, जिससे उनके अगले कदम को लेकर संशय बरकरार है.

दूसरी तरफ, कृष्णानगर की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा भी चुनाव नतीजों के बाद से सार्वजनिक रूप से ज्यादा नजर नहीं आई हैं, हालांकि उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ममता का मजबूती से समर्थन किया और बागियों को नसीहत दी कि “जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे खुद को असली तृणमूल नहीं कह सकते.” वहीं, ममता सरकार में शिक्षा मंत्री रहे और अक्सर विवादों में घिरे रहने वाले ब्रत्या बसु, जो हर मुद्दे पर मीडिया के सामने आते थे, हार के बाद से पूरी तरह गायब हैं और मीडिया से दूरी बना ली है.

⚔️ काकोली घोष दस्तीदार के बागी तेवर, ऋतब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के साथ दी ‘असली टीएमसी’ की चिट्ठी

नतीजों की घोषणा के बाद से ही बारासात की वरिष्ठ महिला सांसद काकोली घोष दस्तीदार का रुख पूरी तरह बागी बना हुआ है. उन्होंने टीएमसी में अपने सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है और सार्वजनिक रूप से पार्टी लीडरशिप से अपनी नाराजगी जाहिर की है, यहां तक कि वह नए सीएम शुभेंदु अधिकारी की बुलाई गई एक बैठक में भी शामिल हुई थीं. सबसे बड़ा झटका पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने दिया है, जो अब विधानसभा में विपक्ष के नेता बनने की कोशिश में जुट गए हैं. उन्होंने 58 अन्य बागी विधायकों के साथ मिलकर विधानसभा स्पीकर को एक आधिकारिक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने खुद के गुट को ही “असली” तृणमूल कांग्रेस बताया है.

🤝 संकट के दौर में ममता के साथ खड़े दिखे कल्याण बनर्जी, सुदीप, डेरेक और बाबुल सुप्रियो

इस राजनीतिक भूकंप के बीच वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी शुरू से ही ममता बनर्जी के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं. उन्हें ममता के धरने में शामिल होते और बागी गुट के खिलाफ तीखा भाषण देते देखा गया है. कल्याण बनर्जी ने ऋतब्रत गुट की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए मामले को कोर्ट में ले जाने की बात कही है. कल्याण की तरह ही पूर्व सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और चौरंगी से पार्टी विधायक नैना बनर्जी (सांसद सुदीप बनर्जी की पत्नी) भी धरने के मंच पर ममता के ठीक बगल में बैठी नजर आ रही हैं. वहीं, दमदम सीट से चुनाव हारने के बावजूद पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ममता के सभी कार्यक्रमों का प्रबंधन संभाल रही हैं.

इस संकट में गायक से नेता बने राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने भी खुलकर ममता के साथ खड़े होने का दावा किया है. उन्होंने फेसबुक पर दो लंबे पोस्ट लिखकर ममता का जोरदार बचाव किया और कहा कि “अच्छे समय में भले ही कोई साथ न हो, लेकिन बुरे समय में मैं दीदी के साथ ही रहूंगा.”

🏏 परिणाम के अगले ही दिन पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी का इस्तीफा, एक्टर देव ने बीजेपी को दी बधाई

ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा झटका खेल जगत से लगा, जब चुनाव परिणाम के अगले ही दिन 5 मई को क्रिकेटर से नेता बने मनोज तिवारी ने टीएमसी छोड़ने का आधिकारिक ऐलान कर दिया. उन्हें इस चुनाव में बीजेपी की पापिया अधिकारी से करारी हार का सामना करना पड़ा था. इस्तीफे के साथ ही निवर्तमान खेल मंत्री मनोज तिवारी ने पार्टी के ही बड़े नेता अरूप बिस्वास पर टिकट वितरण और रणनीति को लेकर बेहद तीखे हमले बोले.

दूसरी ओर, मशहूर एक्टर देव अधिकारी ने चुनाव परिणाम आने के बाद 6 मई को ही खुलेआम विरोधी दल बीजेपी को उसकी शानदार जीत के लिए बधाई दे दी, जबकि ठीक इसी समय टीएमसी के शीर्ष नेता चुनाव में धांधली और चोरी के गंभीर आरोप लगा रहे थे. अभिनेता-निर्देशक परमब्रत चटर्जी, जो टीएमसी उम्मीदवारों के लिए जमकर प्रचार करते रहे थे, वो भी इस पूरे मसले से दूरी बनाकर चुप बैठे हैं. अब देखना यह बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले वक्त में ममता बनर्जी के साथ कौन-कौन से सितारे टिके रहते हैं और कौन बगावत का रास्ता अपनाते हुए अपनी नई राजनीतिक मंजिल तलाशता है.

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