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झारखण्ड

Jharkhand Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव पर महागठबंधन में दरार; कांग्रेस के फैसले से झामुमो नाराज

झारखंड की सियासत से इस वक्त की एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. राज्य में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान की ओर से एक सीट पर अपने आधिकारिक प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया गया है. कांग्रेस के इस अप्रत्याशित फैसले पर गठबंधन की मुख्य साझीदार झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बेहद कड़ी नाराजगी जताई है और इस फैसले को गठबंधन की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर ‘गठबंधन धर्म’ का पालन नहीं करने का सीधा आरोप मढ़ा है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस नेतृत्व का यह कदम आपसी तालमेल को बिगाड़ने वाला है.

🗳️ ‘लोकसभा और विधानसभा हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जीते’: सुप्रियो भट्टाचार्य ने संख्या बल का हवाला देकर कांग्रेस को घेरा

झामुमो के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने गठबंधन के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि चाहे 2024 का लोकसभा चुनाव रहा हो या फिर उसके बाद का विधानसभा चुनाव, राज्य की विकट और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनके सर्वमान्य नेता हेमंत सोरेन के कुशल नेतृत्व में ही महागठबंधन ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी. उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए याद दिलाया कि लोकसभा में 05 और विधानसभा में रिकॉर्ड 56 सीटें महागठबंधन के खाते में आईं. भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि ऐसे में जब सामने राज्यसभा का इतना महत्वपूर्ण चुनाव है, तो टिकटों का बंटवारा और पूरी रणनीति भी हेमंत सोरेन के नेतृत्व और सहमति से ही तय होनी चाहिए थी, लेकिन कांग्रेस ने बिना जेएमएम को विश्वास में लिए एकतरफा उम्मीदवार घोषित कर दिया. इससे हमारे लाखों समर्पित कार्यकर्ताओं की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है.

👥 दोनों सीटों पर झामुमो प्रत्याशी उतारने की मांग: केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन को फैसले के लिए किया गया अधिकृत

पार्टी के भीतर उबल रहे आक्रोश को सामने रखते हुए महासचिव ने कहा कि झामुमो के जमीनी कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और सभी पदाधिकारियों की यह सामूहिक और पुरजोर इच्छा है कि इस बार राज्यसभा चुनाव में दोनों ही सीटों पर केवल और केवल झामुमो (JMM) का ही प्रत्याशी मैदान में उतरे. उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं की इस तीव्र भावना और मांग से पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन को पूरी तरह से अवगत करा दिया गया है. इसके साथ ही, झामुमो की कोर कमेटी ने आगे का कोई भी कड़ा राजनीतिक निर्णय लेने के लिए हेमंत सोरेन को पूरी तरह से अधिकृत (Authorized) कर दिया है, जिससे अब गेंद पूरी तरह से मुख्यमंत्री के पाले में चली गई है.

💬 ‘हमने हमेशा सम्मान दिया, पर बिहार चुनाव में क्या हुआ?’: कैबिनेट में ज्यादा जगह देने का जिक्र कर जताई तीखी आपत्ति

सुप्रियो भट्टाचार्य ने गठबंधन के पुराने अनुभवों पर दर्द बयां करते हुए कहा कि झामुमो ने हमेशा बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए गठबंधन धर्म को ईमानदारी से निभाया है, लेकिन पड़ोसी राज्य बिहार के चुनाव में हमारे साथ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस का व्यवहार कैसा रहा, यह सबने देखा है. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि झारखंड में संख्या बल बहुत ज्यादा नहीं होने के बावजूद झामुमो ने बड़प्पन दिखाते हुए कांग्रेस को कैबिनेट में सम्मानजनक से ज्यादा जगह दी, यहाँ तक कि महज एक विधायक वाली पार्टी राजद को भी मंत्रिमंडल में शामिल कर पूरा सम्मान दिया गया. झामुमो नेता ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि जब हमने सबको बराबर का सम्मान दिया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ही इस महागठबंधन के सर्वमान्य नेता हैं, तो फिर कांग्रेस ने अपने स्तर पर एकतरफा प्रत्याशी की घोषणा करने का दुस्साहस कैसे कर दिया?

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