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Abhijay Arora Vuyyuru: पंचकूला से न्यूयॉर्क तक का संघर्ष; जानिए कैसे एक असफल छात्र बना गूगल का इंजीनियर

इंटरनेशनल डेस्क: असफलता कभी अंत नहीं होती, बल्कि यह सफलता की सीढ़ी का पहला कदम हो सकती है। पंचकूला के साधारण परिवार से आने वाले अभिजय अरोड़ा की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है। अमेरिका में गूगल में कार्यरत अभिजय ने हाल ही में न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध ‘टाइम्स स्क्वायर’ पर अपनी मां की तस्वीर प्रदर्शित कर उन्हें एक ऐसा सम्मान दिया, जिसने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया है।

📖 पंचकूला से शुरू हुआ संघर्ष और IIT का दर्द

अभिजय का बचपन अभावों में बीता। हरियाणा के पंचकूला में पली-बढ़ी उनकी मां ने खुद पुरानी किताबों से पढ़ाई की, ताकि अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दे सकें। अभिजय के लिए साल 2012 का वह दिन बेहद कठिन था, जब वे IIT प्रवेश परीक्षा में सफल नहीं हो सके। वे बताते हैं, “मैंने अपनी मां को रोते हुए देखा था, और तभी खुद से वादा किया कि मैं उन्हें एक दिन गर्व महसूस कराऊंगा।”

🚀 हार न मानने की जिद और हार्वर्ड तक का रास्ता

अभिजय का सफर बाधाओं से भरा था। 2016 में बिना नौकरी के ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने लगातार मेहनत की। उन्होंने तीन बार GMAT दिया और कई बिजनेस स्कूलों से रिजेक्शन झेला। लोगों ने उनसे ‘अमेरिकन ड्रीम’ छोड़ने को कहा, लेकिन वे अडिग रहे। उनकी मेहनत आखिरकार 2022 में रंग लाई, जब उन्हें ‘हार्वर्ड यूनिवर्सिटी’ में प्रवेश मिला और 2025 में वे गूगल में एक सफल इंजीनियर के रूप में नियुक्त हुए।

❤️ मां के त्याग को नमन

अभिजय का टाइम्स स्क्वायर वाला वीडियो आज सोशल मीडिया पर वायरल है। वे अपनी मां को वीडियो कॉल कर उन्हें डिजिटल बिलबोर्ड पर लगी उनकी तस्वीर दिखाते हैं, जिसे देख मां की आँखों में ख़ुशी के आंसू आ जाते हैं। अभिजय का संदेश साफ है—”उन लोगों के प्रति हमेशा आभारी रहो जिन्होंने अपने सपनों का त्याग करके तुम्हारे सपनों को पूरा किया।”

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