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Dantewada Education News: नक्सलगढ़ में शिक्षा की नई रोशनी; बड़ेपल्ली, लावा और बैंगपाल में पहली बार खुले स्कूल

दंतेवाड़ा: कभी नक्सल प्रभावित और विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर माने जाने वाले मलांगिर क्षेत्र में अब बदलाव की नई कहानी लिखी जा रही है। वर्षों तक शिक्षा से वंचित रहे तीन दूरस्थ गांवों—बड़ेपल्ली, लावा और बैंगपाल में आजादी के बाद पहली बार स्कूल शुरू हुए हैं। शिक्षा सत्र 2026-27 के पहले दिन इन गांवों के 65 बच्चों ने औपचारिक शिक्षा की दहलीज पर कदम रखा है।

⛰️ 15 किलोमीटर की दुर्गम यात्रा और शिक्षा का संकल्प

यह बदलाव रातों-रात नहीं आया। गर्मी की छुट्टियों के दौरान शिक्षा विभाग की टीम ने लगभग 15 किलोमीटर का कठिन और दुर्गम रास्ता पैदल तय कर इन गांवों का दौरा किया। अधिकारियों और शिक्षकों ने घर-घर जाकर सर्वे किया, बच्चों की पहचान की और उनके अभिभावकों को शिक्षा के महत्व से रूबरू कराया। जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद ठाकुर के अनुसार, बच्चों के दस्तावेज बनवाकर उनके नामांकन की प्रक्रिया पूरी की गई।

🛖 ग्रामीणों की प्रतिबद्धता: खुले आसमान के नीचे शुरू हुई थी पढ़ाई

इन गांवों में शिक्षा के प्रति जागरूकता तो थी, लेकिन संसाधनों का अभाव था। स्कूल भवन न होने के बावजूद ग्रामीणों ने स्वयं झोपड़ीनुमा अस्थायी स्कूल बनाकर बच्चों को पढ़ाने का साहसी प्रयास किया था, जो उनकी शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अब जिला प्रशासन के सहयोग से इन गांवों में न केवल अस्थायी व्यवस्था की गई है, बल्कि आने वाले समय में स्थायी स्कूल भवन और पक्की सड़क बनाने का भी संकल्प लिया गया है।

🚀 8 हजार नए एडमिशन का लक्ष्य और भविष्य की राह

मलांगिर क्षेत्र की यह पहल केवल स्कूल खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है। जिला प्रशासन ने इस सत्र में पहली कक्षा में लगभग 8 हजार नए एडमिशन का लक्ष्य रखा है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रमोद भदौरिया ने बताया कि विभाग उन 1706 शाला त्यागी बच्चों की पहचान कर रहा है, जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी थी। साथ ही पलायन कर गए परिवारों के बच्चों को भी मुख्यधारा से जोड़ने की कवायद जारी है।

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