ब्रेकिंग
संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन राज्यसभा में जोरदार हंगामा, खरगे के 'मंच शुद्धिकरण' बयान पर सत्ता प... सतवास के मोहाईजागीर में नाले के तेज बहाव में मासूम बच्चा लापता, रातभर सर्चिंग के बाद फिर शुरू हुआ रे... ग्वालियर में 13 वर्षीय नाबालिग किशोरी का अपहरण कर दिल्ली में दुष्कर्म, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्त... सिंहस्थ 2028 के लिए एमपी सरकार का बड़ा कदम, UDA के पूर्व प्रमुख जगदीश अग्रवाल बने सिंहस्थ मेला प्राध... मध्य प्रदेश में अब रातभर गुलजार रहेंगे बाजार, राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 'मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्ति... आखिरकार सागर में बनेगा नया एयरपोर्ट: केंद्रीय मंत्री और विधायक शैलेंद्र जैन की वार्ता के बाद रास्ता ... छतरपुर में दर्दनाक हादसा: जटाशंकर धाम से लौट रही अनियंत्रित कार 50 फीट गहरे कुएं में गिरी, 1 युवक की... चार दशकों से ओंकारेश्वर वन्यजीव अभयारण्य की अधिसूचना लंबित, MP हाईकोर्ट ने स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड क... श्योपुर: अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग की टीम पर पथराव व हमला, कई कर्मचारी घायल; रघुनाथपुर थाने में माम... दुबई से अवैध कारोबार चलाने वाले सतीश सनपाल को झटका: MP हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार, चलेग...
झारखण्ड

Land Dispute Dhamtari: पारंपरिक व्यवसाय के लिए आरक्षित जमीन पर खेल मैदान बनाने का विरोध; कुम्हार समाज ने लगाई न्याय की गुहार

धमतरी: जिले के ग्राम बारना में कुम्हार समाज अपनी पारंपरिक आजीविका को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि उनके पारंपरिक व्यवसाय के लिए वर्ष 2008 में आरक्षित की गई भूमि को अब खेल मैदान के रूप में उपयोग करने की साजिश रची जा रही है। समाज का कहना है कि ऐसा होने से उनकी आजीविका और सांस्कृतिक पहचान दोनों पर संकट खड़ा हो जाएगा।

📜 क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2008 में ग्राम बारना में खसरा नंबर 514/2 (1.84 हेक्टेयर) भूमि कुम्हार समाज के पारंपरिक व्यवसाय (मिट्टी के बर्तन बनाने) के लिए आरक्षित की गई थी। वहीं, खेल मैदान के लिए खसरा नंबर 514/3 (2 हेक्टेयर) भूमि पहले से ही निर्धारित है। समाज का आरोप है कि ग्राम पंचायत और कुछ ग्रामीणों द्वारा अब कुम्हार समाज की आरक्षित भूमि पर खेल मैदान विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि गलत और नियमानुसार नहीं है।

👨‍🌾 समाज की पारंपरिक पहचान है दांव पर

कुम्भकार समाज के जिलाध्यक्ष गगन कुम्भकार का कहना है कि यह जमीन केवल व्यवसाय का जरिया नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त भूमि से उन्हें मिट्टी और अन्य संसाधन मिलते हैं। यदि इस भूमि का उपयोग अन्य कार्य के लिए किया जाता है, तो समाज के लोगों और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी पारंपरिक कला को जीवित रखना कठिन हो जाएगा।

🏛️ प्रशासन का आश्वासन

अपर कलेक्टर इंदिरा सिंह ने कुम्हार समाज के प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और सभी पक्षों को सुनने के बाद ही नियमानुसार उचित निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आरक्षित भूमि से जुड़े किसी भी मामले में तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।

Related Articles

Back to top button