ब्रेकिंग
Delhi News: सेंट्रल दिल्ली में काली मंदिर के पास कबाड़ी की झुग्गी से मिला मानव कंकाल, इलाके में मचा ... वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हुई आसान: अब नहीं काटने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर, घर आएंगे बीएलओ भारी बारिश के अलर्ट के बाद चारधाम यात्रा दो दिन के लिए स्थगित: श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता IND vs WI 1st ODI: मैच से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका, शुभमन गिल चोटिल; जानिए संभावित प्लेइंग-11 Dev Anand 103rd Birth Anniversary: जैकी श्रॉफ ने देव आनंद को किया याद, शेयर कीं अनदेखी तस्वीरें; बता... Congo Plane Crash: कांगो में भीषण विमान हादसा, सेना के दो शीर्ष जनरलों समेत 14 लोगों की दर्दनाक मौत सरकारी बैंकों की 3 दिन की हड़ताल: ग्राहकों को राहत, लिमिट से ज्यादा पैसे निकालने पर माफ रहेगा ATM चा... AI Travel Planning Tips: ट्रिप प्लानिंग होगी आसान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मिनटों में बनाएं परफेक्... Purnima Shradh 2026: पूर्णिमा श्राद्ध आज, शाम को पितरों के निमित्त कितने दीपक जलाएं? जानिए सही दिशा ... Srinagar Tour for Couples: कपल्स के लिए बेस्ट है श्रीनगर, शिकारा राइड से मुगल गार्डन तक हर पल बनेगा ...
मध्यप्रदेश

MP High Court News: राम राजा मंदिर दान हेराफेरी मामला; मुन्नालाल तिवारी को बड़ी राहत, अब मामले में नई बहस शुरू

ओरछा/निवाड़ी: बुंदेलखंड की दूसरी अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा के राम राजा मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के बहुचर्चित मामले में हाईकोर्ट, जबलपुर ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन मंदिर लिपिक मुन्नालाल तिवारी के खिलाफ 2017 में दर्ज की गई एफआईआर को निरस्त कर दिया है। यह मामला 9 वर्षों से प्रशासनिक और कानूनी दांव-पेच में उलझा हुआ था।

📂 क्या था पूरा मामला और 16 बिंदुओं की जांच?

वर्ष 2017 में मंदिर की दानराशि और आभूषणों में गड़बड़ी की शिकायत तत्कालीन कलेक्टर प्रियंका दास से की गई थी। जतारा एसडीएम द्वारा 16 बिंदुओं पर की गई जांच में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख था, जिसके आधार पर लिपिक मुन्नालाल तिवारी को बर्खास्त कर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। हालांकि, तिवारी का पक्ष यह रहा कि वे केवल लिपिकीय कार्य करते थे और मुख्य वित्तीय निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिए जाते थे। वर्ष 2019 में लोकायुक्त की जांच में भी उन पर लगे आरोप निराधार पाए गए थे।

🔥 राजनीतिक रंग में रंगा मामला, SIT जांच की मांग

हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ओरछा मामले में एसआईटी (SIT) जांच की मांग उठाई है। पटवारी का कहना है कि 9 साल बीत जाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि मंदिर की राशि में गड़बड़ी के लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन है। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता विवेक गुप्ता ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से देख रही है।

❓ 9 साल बाद भी जांच के नतीजे क्यों हैं शून्य?

इस मामले ने प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता रामनरेश दास ने आरोप लगाया है कि पुलिस-प्रशासन ने शुरुआत से ही मामले की लीपापोती की। अब हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर निरस्त होने के बाद यह सवाल और भी प्रासंगिक हो गया है कि यदि अनियमितताएं हुई थीं, तो उनके असली जिम्मेदार कौन हैं और इतने लंबे समय तक जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक क्यों नहीं पहुंच सकी?

Related Articles

Back to top button