ब्रेकिंग
ED Officers SC ST Act Case Ranchi: हाईकोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय, 2 नवंबर को होगी अगल... Jharkhand Food Department Guidelines: अवैध एलपीजी उपयोग रोकने के लिए जिला प्रशासन और तेल कंपनियों मे... Charged for Impact Event Dhanbad: इंडस्ट्री और एकेडमिक सहयोग पर विशेष चर्चा, कई दिग्गज हुए शामिल 174 यात्रियों की जान बचाने वाले जांबाज कैप्टन: स्मित मछार को 'गुजरात गरिमा पुरस्कार' से नवाजेगी सरका... Ranchi News: नामकुम में स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान के तहत विशेष कार्यक्रम, मंत्री योगेंद्र प्रसाद ... चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका: संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर उठे... Dhamtari Snake Bite News: घर में सो रही मां और मासूम बेटी को करैत सांप ने डसा, डेढ़ साल की बच्ची की द... INDIA गठबंधन के साथ हैं, लेकिन राहुल गांधी की पीएम उम्मीदवारी पर साधी चुप्पी: मध्यावधि चुनाव के संके... CGPSC and UPSC Success Story: कैंसर को मात देकर अधिकारी बने संजय डहरिया की कहानी से युवाओं को मिली प... Chhattisgrah Politics Update: विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही यात्रा, 7 अक्टूबर को पहुंचेगी...
हरियाणा

Sanjay Barwasni Protest: सोनीपत में जिला पार्षद का प्रदर्शन; अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे, सरकार को दी चेतावनी

सोनीपत: हरियाणा के सोनीपत में जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने विरोध का एक ऐसा तरीका अपनाया कि हर कोई देखता रह गया। आज वे खुद को बैलगाड़ी पर रखे एक पिंजरे के अंदर बेड़ियों से बांधकर जिला पंचायत कार्यालय की ओर निकले। उनका यह प्रदर्शन सरकार को जिला पार्षदों की अनदेखी और उनके अधिकारों के प्रति जगाने के लिए था।

📢 मुख्य मांग: विधायक और सांसद की तर्ज पर मिले ग्रांट

संजय बड़वासनी का कहना है कि जिला पंचायत लोकतंत्र की सबसे छोटी और महत्वपूर्ण इकाई है, जिसके जरिए धरातल पर विकास कार्य किए जाते हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जिला पार्षदों की शेष मांगों पर जल्द गौर नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर सरकार के खिलाफ लामबंद होंगे। उनकी प्रमुख मांग है कि उन्हें भी विधायक और सांसद की तर्ज पर विकास कार्यों के लिए पर्याप्त ग्रांट दी जाए।

⚖️ अधिकारों के लिए सरकार को जगाने की कवायद

प्रदर्शनकारी पार्षद का कहना है कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सहमति तो जताई है, लेकिन कई महत्वपूर्ण मांगें अभी भी फाइलों में दबी हुई हैं। सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए ही उन्होंने इस अनोखे तरीके को चुना है। यह प्रदर्शन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उन जनप्रतिनिधियों की आवाज है जो अपने क्षेत्र में विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं, लेकिन अधिकारों के अभाव में बंधे हुए हैं।

Related Articles

Back to top button