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Ambikapur News: अंबिकापुर में 100 करोड़ की लागत से बनेगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट; हर दिन साफ होगा 3.20 करोड़ लीटर पानी

अंबिकापुर: शहर के जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए अंबिकापुर नगर निगम एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम कर रहा है। शहर में कुल 32 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना के माध्यम से शहर की नालियों और नालों के दूषित पानी को उपचारित (Filter) कर उसे पुन: उपयोग के योग्य बनाया जाएगा।

💧 पानी का होगा बहुआयामी उपयोग

प्रोजेक्ट के इंजीनियर आलोक यादव और स्वच्छ भारत मिशन के नोडल अधिकारी रितेश सैनी के अनुसार, इस प्लांट में फिल्टर किया गया पानी पीने योग्य नहीं होगा, लेकिन इसका उपयोग अन्य क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा:

  • कृषि और सिंचाई: किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा।

  • औद्योगिक उपयोग: कारखानों और निर्माण कार्यों में इस रिसाइकिल पानी का उपयोग हो सकेगा।

  • सार्वजनिक उपयोग: सड़कों की धुलाई, पार्कों के रखरखाव और अग्निशमन (Fire fighting) में यह पानी काम आएगा।

🌍 पर्यावरण संरक्षण और भू-जल स्तर में सुधार

वर्तमान में अंबिकापुर में प्रतिदिन लाखों लीटर दूषित पानी नालों के माध्यम से बिना उपचार के नदियों में गिर रहा है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है। रितेश सैनी का कहना है कि इस उपचारित जल का उपयोग करने से पेयजल (Fresh Water) पर निर्भरता कम होगी और भू-जल स्तर (Ground Water Level) को रिचार्ज करने में मदद मिलेगी। यह ‘वाटर रिसाइक्लिंग’ की दिशा में एक इको-फ्रेंडली कदम है।

गंगा बेसिन के नियमों का पालन

अंबिकापुर ‘नमामी गंगे’ प्रोजेक्ट के तहत गंगा बेसिन की सूची में शामिल है, क्योंकि यहाँ का पानी रिहंद नदी के माध्यम से सोन और अंततः गंगा में मिलता है। नगर निगम आयुक्त डी.एन. कश्यप ने बताया कि शहर के तीन मुख्य नालों पर 16 एमएलडी, 14 एमएलडी और 2 एमएलडी क्षमता के तीन प्लांट (शंकर घाट, सेनेटरी पार्क और सरगंवा में) लगाए जा रहे हैं। इससे नदियों में जाने वाला पानी पूरी तरह शुद्ध होगा, जिससे गंगा के प्रदूषण को कम करने में भी सहयोग मिलेगा।

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