ब्रेकिंग
ED Officers SC ST Act Case Ranchi: हाईकोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय, 2 नवंबर को होगी अगल... Jharkhand Food Department Guidelines: अवैध एलपीजी उपयोग रोकने के लिए जिला प्रशासन और तेल कंपनियों मे... Charged for Impact Event Dhanbad: इंडस्ट्री और एकेडमिक सहयोग पर विशेष चर्चा, कई दिग्गज हुए शामिल 174 यात्रियों की जान बचाने वाले जांबाज कैप्टन: स्मित मछार को 'गुजरात गरिमा पुरस्कार' से नवाजेगी सरका... Ranchi News: नामकुम में स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान के तहत विशेष कार्यक्रम, मंत्री योगेंद्र प्रसाद ... चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका: संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर उठे... Dhamtari Snake Bite News: घर में सो रही मां और मासूम बेटी को करैत सांप ने डसा, डेढ़ साल की बच्ची की द... INDIA गठबंधन के साथ हैं, लेकिन राहुल गांधी की पीएम उम्मीदवारी पर साधी चुप्पी: मध्यावधि चुनाव के संके... CGPSC and UPSC Success Story: कैंसर को मात देकर अधिकारी बने संजय डहरिया की कहानी से युवाओं को मिली प... Chhattisgrah Politics Update: विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही यात्रा, 7 अक्टूबर को पहुंचेगी...
देश

दिल्ली चुनाव : अमित शाह ने अपने हाथ में ली अभियान की कमान

प्रधानमंत्री के लोकसभा में केंद्रीय बजट की प्रस्तुति के बाद 1 फरवरी से दिल्ली विधानसभा चुनाव में 5-6 रैलियों को संबोधित करने की संभावना है। वहीं पार्टी सूत्रों का मानना है कि लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर रैलियों की संख्या बढ़ाई या कम की जा सकती है। इसके साथ ही भाजपा ने दिल्ली चुनाव में अपना पूरा दम लगा दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे अभियान को अपने हाथों में ले लिया है और यहां तक कि वे सड़क के किनारे की बैठकों को संबोधित कर रहे हैं और एक साथ घंटों तक व्यक्तिगत रूप से रोड शो कर रहे हैं। ऐसा उन्होंने लोकसभा चुनावों में भी नहीं किया था।
भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को भी रैलियों के आयोजन का काम सौंपा गया है, भले ही रैलियों में भीड़ कितनी भी हो। नड्डा दिल्ली विधानसभा चुनाव के पीछे अपना पूरा समय दे रहे हैं। इतना ही नहीं, दोनों नेता अमित शाह और जे.पी. नड्डा कल राष्ट्रपति भवन में सबसे महत्वपूर्ण एट होम में शामिल नहीं हुए। राष्ट्रपति ने दोनों को गणतंत्र दिवस समारोह में आमंत्रित किया था, लेकिन दोनों ने अनुष्ठान में भाग लेने की बजाय परेड के बाद दिल्ली में प्रचार करने का विकल्प चुना। दिल्ली को 10 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है और सभी वरिष्ठ नेताओं को लोगों को वोट देने के लिए जुटाने पर ध्यान केंद्रित करने का काम सौंपा गया है। पार्टी पी.एम. की रैलियों के लिए जमीन तैयार करना चाहती है और पूरी तरह से उनके करिश्मे और लोकप्रियता के आधार पर बैंक बनाना चाहती है।
अमित शाह ने मुख्यमंत्री पद के लिए किसी को भी प्रोजैक्ट किए जाने की अनुमति नहीं दी है। इतना ही नहीं, भाजपा नेतृत्व ने मनोज तिवारी, गौतम गंभीर, मीनाक्षी लेखी, विजय गोयल और सांसदों को मैदान में उतारने की अपनी योजना को छोड़ दिया। नेतृत्व को लगा कि अगर मोदी के नाम पर चुनाव लडऩा है, तो विधानसभा के लिए चुनाव लड़ने के लिए सांसदों को क्यों आगे रखा जाए?
इसी तरह ‘आप’ व कांग्रेस से लडऩे के लिए पार्टी ने कई नए चेहरों को चुना। जैसे कि अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नए चेहरे सुनील यादव को उतार सीनियर्स ने दिखाया कि उन्हें स्थानीय चुनावों की कोई आवश्यकता नहीं है। दरअसल, विजय जौली, आरती मेहरा, अजय मल्होत्रा दिल्ली के पूर्व मुख्य महानगर पार्षद विजय कुमार मल्होत्रा के बेटे, मदनलाल खुराना के बेटे हरीश खुराना, सुधांशु मित्तल को प्रतियोगिता की बजाय प्रचार करने के लिए कहा गया था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button