ब्रेकिंग
गुरुग्राम में मूसलाधार बारिश से सड़कें बनीं दरिया: दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे पर लगा भीषण जाम, वर्क फ्... हिल स्टेशन पचमढ़ी में दिल दहला देने वाली वारदात: जंगल में ले जाकर 17 वर्षीय छात्रा से सामूहिक दुष्कर... IRCTC अधिकृत एजेंट पर नहीं चलेगा रेलवे एक्ट की धारा 143 का केस: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रद्द किया क्... एमपी-यूपी बॉर्डर पर चंबल पुल पर हाई-वोल्टेज ड्रामा, जाली से लटका दुष्कर्म का आरोपी युवक 'स्किल नई करेंसी और इनोवेशन नई इकॉनॉमी': समृद्ध मध्य प्रदेश 2047 में बोले सीएम डॉ. मोहन यादव नई दिल्ली में गौरव सम्मान समारोह-2026, प्रिया थरेजा के आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाएं सम्म... छिंदवाड़ा में भारी बारिश के मौसम में भी गहराया पेयजल संकट: 147 में से 96 तालाब सूखे, महीने में 15 दि... खजुराहो के मतंगेश्वर महादेव: हर साल बढ़ता है रहस्यमयी जीवित शिवलिंग, सावन के अंतिम सोमवार उमड़ा जनसै... रतलाम कृषि मंडी में अचानक छुट्टी पर भड़के किसान: 600 प्याज की ट्रालियां खड़ी कर महू-नीमच रोड किया जा... 'ट्रस्ट में आंदोलन से जुड़े लोग नहीं': राम मंदिर विवाद और 'जैन-जी' आंदोलन पर बोले भोजपाली बाबा रविंद...
विदेश

Ashura in Iran: ईरान में मुहर्रम का मातम; इमाम हुसैन की शहादत को याद कर भावुक हुए लोग

ईरान: इस वर्ष ईरान में मुहर्रम और आशूरा का पर्व पहले से कहीं अधिक भावुकता और गम के माहौल में मनाया गया। फरवरी में हुए अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद यह पहला मुहर्रम था, जिसमें लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत के साथ-साथ हालिया युद्ध में मारे गए अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई, सैन्य अधिकारियों और हजारों आम नागरिकों को भी याद किया।

🏴 आशूरा: अन्याय के खिलाफ कुर्बानी का दिन

आशूरा का दिन 680 ईस्वी में हुई कर्बला की जंग की याद में मनाया जाता है। इमाम हुसैन ने यजीद की विशाल सेना के सामने अन्याय के खिलाफ डटकर कुर्बानी दी थी। यही कारण है कि आज भी आशूरा को दुनिया भर में ‘अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े होने’ का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। ईरान के शहरों और गांवों में लाखों लोग सड़कों पर उतरे, सीना पीटकर मातम किया और नौहे (शोक गीत) गाकर इमाम की कुर्बानियों को नमन किया।

💧 तासुआ और हजरत अब्बास की याद

आशूरा से एक दिन पहले ‘तासुआ’ मनाया गया, जिसमें इमाम हुसैन के सौतेले भाई हजरत अब्बास को याद किया गया, जो कर्बला में प्यासे बच्चों के लिए पानी लाते हुए शहीद हो गए थे। इस दौरान ईरान के अलावा इराक के पवित्र शहर कर्बला में भी दुनिया भर से लाखों जायरीन पहुंचे और इमाम की दरगाह पर अकीदत के फूल चढ़ाए।

🤲 इंसानियत और सेवा का संदेश

मुहर्रम के दौरान पूरे ईरान में ‘नज़री’ (मुफ्त भोजन) का वितरण किया गया। यह परंपरा इमाम हुसैन की इंसानियत, सेवा और उदारता की सीख को जीवंत रखती है। ज़रूरतमंदों और मातम करने वालों को भोजन कराकर लोगों ने कर्बला की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

Related Articles

Back to top button