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Iran-US Tensions: होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता तनाव; समझौते के बाद भी आमने-सामने आए ईरान और अमेरिका

अंतरराष्ट्रीय: 17 जून को हुए समझौते के बाद भी ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव गहरा गया है। दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते के आर्टिकल-5 का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, अब फिर से वैश्विक कूटनीति और व्यापार का केंद्र बन गया है।

⚖️ विवाद की जड़: क्या है आर्टिकल-5?

समझौते के आर्टिकल-5 के तहत ईरान को 60 दिनों तक व्यापारिक जहाजों को बिना किसी शुल्क के सुरक्षित रास्ता देना था और 30 दिनों के भीतर समुद्र से सैन्य बाधाएं हटानी थीं। हालांकि, अब विवाद इस पर है कि इस समुद्री क्षेत्र पर नियंत्रण किसका रहेगा। ईरान इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की जिम्मेदारी मानता है, जबकि अमेरिका चाहता है कि आवाजाही पूरी तरह स्वतंत्र रहे, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भी भूमिका हो।

⚠️ समुद्री व्यापार पर पड़ रहा असर

हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हुए हमलों के बाद तनाव और बढ़ गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) द्वारा केवल ‘उत्तरी समुद्री मार्ग’ के उपयोग की चेतावनी के बाद कई तेल टैंकरों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ रहा है।

  • व्यापार में गिरावट: होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या 70 से घटकर 40 रह गई है, जो विश्व बाजार में तेल की कीमतों को लेकर चिंता का बड़ा कारण है।

🔍 भविष्य की संभावनाएं

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि किसी भी बाहरी दखल से हालात और बिगड़ सकते हैं। वहीं, अमेरिका वैकल्पिक मार्गों की तलाश में जुटा है, जिसे ईरान अपने प्रभाव को कम करने की कोशिश मान रहा है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल दोनों ही पक्ष बड़े युद्ध से बचने की कोशिश कर रहे हैं और कूटनीतिक बातचीत की गुंजाइश अब भी बनी हुई है।

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