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सख्ती का शिकार कारोबार, श्रमिकों के बिना उद्योग-व्यापार का पहिया कैसे घूमेगा

अब हर कोई समझ रहा है कि कोरोना से उपजी कोविड-19 महामारी हाल-फिलहाल खत्म होने नहीं जा रही है। इसीलिए सरकार से लेकर चिकित्सक तक कह रहे हैं कि हमें कोरोना के साये में जीना होगा और इसके लिए एक-दूसरे से शारीरिक दूरी के नियम का पालन करने के साथ ही सेहत के प्रति सतर्क रहना होगा। सबसे अधिक ध्यान अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर देना होगा, क्योंकि कोरोना वायरस उन्हें ही आसानी से चपेट में ले रहा है जिनके शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर है। हालांकि इस महामारी से मुकाबले के लिए टीके की खोज जारी है, लेकिन लगता नहीं कि उसे जल्द हासिल किया जा सकता है। कोई कारगर टीका विकसित होने और उसे सब तक पहुंचने में एक वर्ष से अधिक समय लग सकता है। ऐसे में सबकी भलाई इसी में है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने को लेकर सचेत रहा जाए

कोरोना से छुटकारा न मिलते देख लॉकडाउन के चौथे चरण में दी गई व्यापक छूट 

कोरोना वायरस से छुटकारा मिलते न देखकर ही लॉकडाउन के चौथे चरण में व्यापक छूट दी गई है। इसका उद्देश्य कारोबारी गतिविधियों को बल देना है। हालांकि सिनेमा, रेस्त्रां, जिम के साथ स्कूल-कॉलेज बंद रखे गए हैं, लेकिन अन्य कारोबारी गतिविधियों को हरी झंडी देने के साथ रेल एवं हवाई यात्रा की भी शुरुआत की जा रही है। यह आवश्यक था, क्योंकि बिना आवाजाही कारोबार गति नहीं पकड़ सकता। कारोबारी गतिविधियों को बल देना इसलिए जरूरी है, क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया गया तो महामारी से अधिक नुकसान काम-धंधा ठप होने से हो सकता है। ऐसे आंकड़े सामने आ रहे हैं कि देश में लाखों लोगों की नौकरियां चली गई हैं। दुनिया के अन्य देशों में भी यही हो रहा है। माना जा रहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध में भी इतना नुकसान नहीं हुआ था जितना इस महामारी के चलते सब कुछ थम जाने से हो गया है।

लॉकडाउन-4.0: कारोबारी गतिविधियां शुरू करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है

लॉकडाउन के चौथे चरण के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में यह अपेक्षित है कि कारोबारी गतिविधियां शुरू करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है, लेकिन राज्य सरकारें अपने जिला प्रशासनों के जरिये यह सुनिश्चित कर रही हैं कि कोरोना का संक्रमण फैलने न पाए। इसके चलते जिला प्रशासन की परख इससे नहीं हो रही कि कितनी कारोबारी गतिविधियां शुरू हो गई हैं, बल्कि इससे हो रही है कि जिले में कोरोना के मरीज कम हुए या बढ़े? इसके चलते जिला प्रशासन भी इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे कि उद्योग-व्यापार शुरू करने में आ रही अड़चनें दूर हों। कहीं-कहीं जिला प्रशासन के रवैये के कारण अड़चनें दूर होने के बजाय बढ़ रही हैं।

विरोधाभासी नियमों के चलते कारोबारी गतिविधियां ढंग से शुरू नहीं हो पा रही

किस्म-किस्म के विरोधाभासी नियमों के चलते कारोबारियों के बीच असमंजस भी बढ़ रहा है। इस असमंजस को दूर करने में भी तत्परता का परिचय नहीं दिया जा रहा है। परिणाम यह है कि तमाम जगह कारोबारी गतिविधियां ढंग से शुरू नहीं हो पा रही हैं। एक-दूसरे राज्यों में समन्वय और सहयोग की कमी के कारण भी उद्योग-व्यापार का काम आगे नहीं बढ़ रहा है।

जिला प्रशासनों को सचेत रहना होगा कि कोरोना का संक्रमण फैलने न पाए

बतौर उदाहरण दिल्ली और एनसीआर में आवाजाही में तमाम अड़ंगेबाजी देखने को मिल रही है। यहां आवाजाही जटिल बनी हुई है तो इसी कारण कि जगह-जगह चेक प्वाइंट बनाए गए हैं। इससे कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने में शायद ही कोई मदद मिल रही हो, क्योंकि चेक प्वाइंट पर महज पास चेक करने का काम हो रहा है, न कि सेहत की जांच का। नि:संदेह जिला प्रशासनों को इसके प्रति भी सचेत रहना होगा कि कोरोना का संक्रमण फैलने न पाए, लेकिन अगर ऐसा कारोबारी गतिविधियां ठप रहने की कीमत पर होगा तो बहुत मुश्किल पेश आने वाली है।

ट्रेनों और बसों से लौट रहे मजदूरों के बीच नियम की हो रही अनदेखी

जिला प्रशासन कारोबारी कामकाज शुरू करने के मामले में तो शारीरिक दूरी के नियम के प्रति तो अति सतर्क हैं, लेकिन इसे लेकर सचेत नहीं कि ट्रेनों और बसों से लौट रहे मजदूरों के बीच इस नियम की अनदेखी हो रही है। बसों और ट्रेनों से लौटते मजदूर शारीरिक दूरी मुश्किल से ही कायम कर पा रहे हैं। जो जिला प्रशासन मजदूरों की जैसे-तैसे जल्द वापसी कराने के फेर में उनके बीच शारीरिक दूरी के पालन की परवाह नहीं कर रहा है वही कारोबारी गतिविधियों के दौरान इसकी कुछ ज्यादा ही चिंता कर रहा है।

आवाजाही प्रभावित होने से घरेलू सहायकों की रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ रहा

जिला प्रशासन की तरह तमाम शहरों में कालोनियों और मोहल्ले की समितियां यानी आरडब्ल्यूए कई तरह के प्रतिबंध कायम किए हुए हैं। इससे आवाजाही प्रभावित होने के साथ घरेलू सहायकों की रोजी-रोटी पर भी बुरा असर पड़ रहा है। सावधानी बरतने के नाम पर जो अति की जा रही है वह खत्म होनी चाहिए। यह ठीक नहीं कि आरडब्ल्यूए के चंद सदस्य अपनी मनमर्जी पूरे मोहल्ले पर थोप दें। जरूरत से ज्यादा सख्ती जारी रहेगी तो फिर काम-धंधे आगे कैसे बढ़ेंगे?

कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा बरकरार

लोग इसे लेकर सचेत हैं कि कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा बरकरार है। आखिर जब रेस्त्रां, सिनेमा आदि बंद हैं तो फिर कोई क्यों सैर-सपाटे के लिए निकलेगा और जोखिम मोल लेगा? यह समझना होगा कि जो लोग निकल रहे हैं वे अपने काम-धंधे के सिलसिले में ही निकल रहे हैं।

आर्थिक गतिविधियां के लिए रीढ़ की हड्डी बने मजदूर गांव जाने को हुए मजबूर 

चिंता की बात केवल यह नहीं कि जिला प्रशासन के रवैये के कारण आवाजाही में परेशानी हो रही है और उसके नतीजे में आर्थिक गतिविधियां सही तरह शुरू नहीं हो पा रही हैं, बल्कि यह भी है कि इन गतिविधियों के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होने वाले मजदूर गांव चले जा रहे हैं। मजदूरों की गांव वापसी का एक कारण तो कारोबारी कामकाज का गति न पकड़ पाना है और दूसरा, उन्हें यह आभास होना है कि उनको उनके हाल पर छोड़ दिया गया।

जब श्रमिक गांव लौट चुके तब उद्योग-व्यापार का पहिया कैसे घूमेगा 

अच्छा होता कि उनके अंदर ऐसी भावना न घर कर पाती। और भी अच्छा यह होता कि शुरूआत में ही उन्हें ट्रेनों और बसों से भेजने की व्यवस्था की जाती। इससे वे न तो पैदल चलने को मजबूर होते, न अनियंत्रित होकर जैसे-तैसे गांव जाने की कोशिश करते और न ही उनकी दर्दभरी कहानियां सामने आतीं। सरकारों को उनकी सुरक्षित वापसी के साथ यह भी सोचना होगा कि जब श्रमिक गांव लौट चुके या फिर लौट रहे हैं तब उद्योग-व्यापार का पहिया कैसे घूमेगा?

कारोबारी गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ाई जाएं, मजदूरों की वापसी के लिए ठोस व्यवस्था बनानी होगी

ऐसे में यही उचित होगा कि केंद्र सरकार राज्यों को और राज्य सरकारें अपने जिला प्रशासनों को ऐसे निर्देश दें कि कारोबारी गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ाई जाएं। इसी के साथ उन्हें गांव लौट चुके मजदूरों की शहर वापसी के लिए भी कोई ठोस व्यवस्था बनानी होगी।

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