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झारखण्ड

Deoghar News: बाबा बैद्यनाथ धाम में निकासी द्वार विवाद, पंडा धर्म रक्षिणी सभा के विरोध के बाद निर्माण कार्य पर सवाल

विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में निकासी द्वार के कथित चौड़ीकरण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर प्रबंधन के प्रमुख संगठन ‘पंडा धर्म रक्षिणी सभा’ ने जिला प्रशासन पर नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। सभा का कहना है कि मंदिर की मूल संरचना और सदियों पुरानी परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

📜 पंडा समाज का तर्क और चेतावनी

पंडा धर्म रक्षिणी सभा के अध्यक्ष सुरेश भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने निर्माण कार्य से पूर्व उनसे कोई परामर्श नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि निकासी द्वार को चौड़ा करने का प्रयास मंदिर की धार्मिक मान्यताओं और ‘गंवाली पूजा’ की प्राचीन परंपरा को प्रभावित करेगा। सभा ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य को नहीं रोका गया, तो वे इस मामले को राज्य के मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे।

🏗️ प्रशासन की सफाई: केवल शेड की मरम्मत हो रही है

दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। एसडीएम सह बाबा मंदिर प्रभारी रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि निकासी द्वार के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा, “मंदिर के बाहर मौजूद एक जर्जर शेड की मरम्मत का काम चल रहा है, ताकि आगामी श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को धूप और बारिश से राहत मिल सके।” प्रशासन के अनुसार, मंदिर की ऐतिहासिक आकृति को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।

⚖️ श्राइन बोर्ड की भूमिका और संवेदनशीलता

बाबा बैद्यनाथ धाम का संचालन श्राइन बोर्ड के अंतर्गत होता है, जिसके अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होते हैं। किसी भी बड़े निर्माण के लिए बोर्ड की स्वीकृति अनिवार्य है। पंडा समाज के विरोध के चलते फिलहाल निर्माण कार्य को रोक दिया गया है, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील बन गया है। अब श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर की परंपराओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती प्रशासन के सामने है।

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