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मध्यप्रदेश

डबरा में सफाई कर्मचारी की संदिग्ध मौत, अपहरण के शक में पुलिसकर्मियों पर पिटाई का आरोप

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में नगर पालिका के एक सफाई कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद बवाल मच गया है। मृतक के परिजनों ने दतिया जिले के गोराघाट थाने में पदस्थ दो पुलिसकर्मियों पर बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने पहले अस्पताल और फिर सिटी थाने का घेराव कर पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। फिलहाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच कर उचित कार्यवाही का भरोसा दिया है।

बच्ची के रोने पर अपहरण के शक में पुलिसकर्मियों ने की पिटाई

जानकारी के मुताबिक, डबरा नगर पालिका में सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत 58 वर्षीय रमेश गौर (निवासी मगरौरा) अपने चचेरे भाई पप्पू और नातिन के साथ बाइक से टेकनपुर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि रास्ते में सिमरिया टेकरी के पास बच्ची किसी बात को लेकर रोने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्ची पेट्रोल सूंघने लगी थी, तो रमेश ने उसे ऐसा करने से रोका और एक थप्पड़ मार दिया। इसके बाद बच्ची जोर-जोर से रोने लगी, जिससे आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई।

इसी दौरान दतिया जिले के गोराघाट थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी जितेंद्र गुर्जर और राजकुमार पलिया वहां से गुजर रहे थे। भीड़ और रोती हुई बच्ची को देखकर उन्हें अपहरण की आशंका हुई। आरोप है कि बिना पूरी जानकारी लिए दोनों पुलिसकर्मियों ने मौके पर मौजूद कुछ लोगों के साथ मिलकर रमेश की पिटाई शुरू कर दी। परिजनों का कहना है कि रमेश लगातार खुद को बच्ची का नाना बताते रहे और बेगुनाह होने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी।

अस्पताल ले जाते समय हुई मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा

कुछ देर बाद रमेश के परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें वहां से छुड़ाकर अपने साथ ले गए। परिजनों का आरोप है कि पिटाई के कारण रमेश की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार और समाज के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचे और बाद में सिटी थाने का घेराव कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग करने लगे।

अधिकारियों ने दिया जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर पुलिसकर्मी पहले पूरी सच्चाई जान लेते, तो एक निर्दोष व्यक्ति की जान नहीं जाती। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध सामने आती है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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