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मध्यप्रदेश

दमोह के डॉ. अनिल चौधरी का अद्भुत संग्रह: 2500 साल पुरानी मुद्राओं और दुर्लभ सिक्कों का खजाना

दमोह शहर के 77 वर्षीय रिटायर्ड आयुष अधिकारी डॉ. अनिल चौधरी पर 35 साल पहले ऐसी धुन सवार हुई कि आज उनके पास देश-दुनिया की हजारों साल पुरानी दुर्लभ मुद्राओं और सिक्कों का विशाल भंडार जमा हो गया है। डॉ. अनिल चौधरी को यह प्रेरणा अपने पिता शिखरचंद जैन और दादा दरयाव लाल चौधरी से मिली, जिन्होंने चांदी की डिब्बी में कुछ दुर्लभ सिक्के सहेज कर रखे थे। 1975 में नेपाल यात्रा के दौरान उनके मन में सिक्कों और नोटों के संग्रह का जो विचार आया, वह आज एक समृद्ध इतिहास में बदल चुका है।

🏛️ ढाई हजार साल पुरानी ऐतिहासिक मुद्राएं

डॉ. अनिल चौधरी के संग्रह में गौतम बुद्ध के समय के सबसे प्राचीन सिक्कों के अलावा आचार्य चाणक्य, चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक के शासनकाल की मुद्राएं भी शामिल हैं, जो लगभग ढाई हजार साल पुरानी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने रोमन साम्राज्य का एक दुर्लभ सिक्का भी खरीदा था, जिसकी ऐतिहासिक और बाजार कीमत समय के साथ लाखों में पहुँच गई।

👑 सिक्कों पर दर्ज है राजाओं का इतिहास

उनके संग्रह में सिकंदर, शुंग वंश, कुषाण वंश, कुमार गुप्त, सातवाहन, नागवंश, राजा चोल और कृष्णदेव राय से लेकर रजिया सुल्तान, बाबर, हुमायूं और अकबर कालीन सिक्के मौजूद हैं। इन सिक्कों की सबसे बड़ी विशेषता उन पर अंकित राजाओं के चित्र, राज्य चिह्न, ढलाई का संवत और उस दौर की तत्कालीन भाषा है। उनके पास सोने, चांदी, पीतल और तांबे जैसी हर धातु के सिक्के उपलब्ध हैं।

📜 दुर्लभ स्टांप और कोर्ट फीस टिकटों का संग्रह

सिक्कों के अलावा डॉ. चौधरी ने अंग्रेजी शासनकाल से लेकर वर्तमान तक के स्टांप पेपर और कोर्ट फीस टिकटों का भी अद्भुत संग्रह किया है। उनके पास रानी विक्टोरिया, किंग एडवर्ड और पंचम जॉर्ज के समय के दो आना से लेकर 100 रुपये तक के कीमती स्टांप मौजूद हैं। वे बताते हैं कि उन्होंने दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के सराफा बाजारों से कड़ी मेहनत के बाद यह विरासत जुटाई है, जिसे उन्होंने बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा है।

🌍 दमोह का गौरव और वैश्विक मुद्राएं

डॉ. अनिल चौधरी के संग्रह में न केवल भारत, बल्कि अमेरिका सहित 38 देशों की कागजी मुद्राएं भी शामिल हैं। विशेष बात यह है कि उनके पास दमोह और गढ़ाकोटा की तत्कालीन रियासतों की टकसालों में बने सिक्के भी मौजूद हैं। इसके अलावा ओरछा, विदिशा, छतरपुर, झांसी, ग्वालियर और मराठाकालीन साम्राज्य के दुर्लभ सिक्के उनकी कड़ी मेहनत और इतिहास के प्रति प्रेम की गवाही देते हैं।

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