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मध्यप्रदेश

MP High Court: बीजेपी विधायक संजय पाठक को बड़ी राहत, आपराधिक अवमानना मामले में बिना शर्त माफी स्वीकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बीजेपी विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) कार्रवाई का निपटारा करते हुए उनकी बिना शर्त माफी स्वीकार कर ली है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी लंबित मामले से जुड़े व्यक्ति को सुनवाई कर रहे जज से मिलने, फोन करने या संदेश भेजने का प्रयास नहीं करना चाहिए। अदालत ने विधायक को भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की कड़ी चेतावनी दी है।

📞 क्या था पूरा मामला और कैसे हुई शुरुआत?

इस मामले की शुरुआत आशुतोष दीक्षित द्वारा दायर एक रिट याचिका से हुई थी, जिसमें संजय पाठक से जुड़ी तीन कंपनियों पर अवैध खनन कर सरकार को 1200 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप की जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। 1 सितंबर 2025 को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने अपने आदेश में जिक्र किया कि विधायक संजय पाठक ने उनसे चर्चा करने के लिए फोन करने का प्रयास किया था, जिसके बाद उन्होंने खुद को मामले से अलग कर लिया था। इसके बाद 2 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।

📝 विधायक ने मांगी बिना शर्त माफी और जताया पश्चाताप

सुनवाई के दौरान विधायक संजय सत्येंद्र पाठक की ओर से जवाब दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी गई। उन्होंने कहा कि 30 अगस्त 2025 के आसपास उनसे गलती से न्यायाधीश विशाल मिश्रा को कॉल लग गई थी, जिसे तुरंत काट दिया गया था और केवल परिचय देने के लिए एक संदेश भेजा गया था। उनका कोई भी इरादा न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का नहीं था। उनके वरिष्ठ अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अनजाने में हुई गलती पर माफी स्वीकार करने का आग्रह किया।

🛑 हाईकोर्ट ने दी चेतावनी और खत्म की कार्रवाई

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जज को फोन करना और संदेश भेजना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की श्रेणी में आता है, लेकिन इस घटना से न्यायिक प्रक्रिया में कोई गंभीर बाधा उत्पन्न नहीं हुई। इसे ध्यान में रखते हुए अदालत ने विधायक की बिना शर्त माफी को स्वीकार कर लिया। साथ ही, अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जनप्रतिनिधियों से न्यायपालिका के प्रति अधिक जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है। इस चेतावनी के साथ ही अदालत ने अवमानना की कार्रवाई को समाप्त कर दिया।

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