ब्रेकिंग
Ranchi News Update: सैटेलाइट चौक पर चले बुलडोजर से बिगड़े हालात; बाईपास जाम, पुलिस से भिड़े आक्रोशित... UP Crime News Prayagraj: संगम नगरी में सपा नेता की हत्या से हड़कंप; पुलिस को पुरानी रंजिश का शक, जां... AAP Punjab News: मान सरकार में हाई-टेक हुई पंजाब पुलिस; कनाडा, अमेरिका और दुबई से गिरफ्तार होकर लौट ... UP Election 2027 Seat Sharing: यूपी चुनाव 2027 में सीट शेयरिंग का पेंच; सपा दे रही 60-70 सीटें, कांग... Bihar NDA Conflict: बिहार एनडीए में रार बढ़ा; UCC, फरक्का और सभापति सीट पर जदयू-भाजपा में ठनी, RJD न... Jharkhand Tribal Politics: पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून को ध्यान में रखकर हो परिसीमन, राज्यपाल से ग... Ranchi Municipal Corporation News: करमा पूजा पर रांची में विशेष सफाई और फॉगिंग अभियान; शिकायत के लिए... Chhattisgarh Wildlife Alert: धमतरी में बीच सड़क पर बैठा दिखा तेंदुआ, वन विभाग ने गंगरेल और रुद्री क्... Raipur CM Vishnu Deo Sai News: रायपुर में सीएम साय ने काफिला रुकवाकर खरीदा 1000 रुपये का दीया; स्ट्र... Ranchi CID Court Action: व्हाट्सएप से लीक की थी आंसर-की! 1000 पन्नों की केस डायरी पेश, श्वेता गुप्ता...
धार्मिक

नाग पंचमी 2026: 17 अगस्त को मनाया जाएगा पर्व, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और नाग देवता की पूजा का धार्मिक महत्व

धार्मिक एवं ज्योतिष: सनातन धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की अनन्य भक्ति के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है। इस पवित्र महीने में शिव पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के साथ-साथ कई प्रमुख व्रत और त्योहार भी श्रद्धापूर्वक मनाए जाते हैं।

इन्हीं में ‘नाग पंचमी’ का पर्व भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करने और उन्हें दूध अर्पित करने की प्राचीन परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग पंचमी का दिन नाग देवताओं की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन नागों की पूजा करने से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और सुरक्षा की कामना की जाती है। चूंकि नाग देव देवाधिदेव महादेव के गले का हार और आभूषण हैं, इसलिए भगवान शिव के प्रिय सावन मास में इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है।

📜 आस्तिक मुनि और राजा जन्मेजय के सर्प यज्ञ से जुड़ी है नाग पंचमी की पौराणिक कथा

नाग पंचमी के पावन पर्व से जुड़ी सबसे प्रचलित और प्रामाणिक पौराणिक कथा महाभारत कालीन राजा जन्मेजय और आस्तिक मुनि से संबंधित है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डसने (सर्पदंश) से हुई थी। पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए उनके पुत्र राजा जन्मेजय ने संपूर्ण नाग जाति के विनाश के लिए एक महाविनाशकारी ‘सर्प यज्ञ’ (सर्प सत्र) का आयोजन किया। कहा जाता है कि इस यज्ञ की आहुतियों में खिंचे चले आकर विश्व भर के बड़े-बड़े सांप और नाग जलकर भस्म होने लगे, जिससे नाग वंश के अस्तित्व पर गहरा संकट मंडराने लगा।

तभी महान आस्तिक मुनि ने अपनी कुशाग्र बुद्धि, ज्ञान और तपस्या के बल पर राजा जन्मेजय को समझा-बुझाकर इस सर्प यज्ञ को तत्काल प्रभाव से बंद करने के लिए राजी कर लिया। इस प्रकार आस्तिक मुनि के प्रयासों से नाग वंश का पूर्ण विनाश होने से बच गया। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, यह ऐतिहासिक घटना श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही घटी थी। इसी वजह से इस शुभ तिथि को नाग देवता की पूजा करने की परंपरा आरंभ हुई।

🐍 नाग पंचमी पर क्यों की जाती है नाग देवता की पूजा? जानिए कालसर्प और सर्प दोष से मुक्ति का रहस्य

हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति में नागों को केवल एक विषैले जीव के रूप में नहीं, बल्कि ‘नाग देवता’ (दैवीय शक्ति) के रूप में भी पूजनीय माना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों में अनेक प्रमुख नागों का वर्णन मिलता है, जिनमें शेषनाग, वासुकी, तक्षक, पद्म, महापद्म, कंबला, कर्कोटक और कालिया नाग आदि मुख्य हैं। नाग पंचमी के दिन नाग देवता का दूध, अक्षत, फूल और कुशा से पूजन कर परिवार की सुरक्षा, आरोग्य और खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ नाग देव की आराधना करने से कुंडली के कालसर्प दोष, नाग दोष और सर्प भय (सांप के काटने का डर) से मुक्ति मिल जाती है।

📅 कब से शुरू होगा सावन 2026? जानिए श्रावण मास की शुरुआत और समापन की तारीखें

हिन्दू वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन का पवित्र और पावन महीना 30 जुलाई 2026, गुरुवार से औपचारिक रूप से शुरू होगा और इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को भाद्रपद की शुरुआत के साथ होगा। सावन के पूरे 30 दिनों में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की उपासना का विशेष फल बताया गया है।

⏰ नाग पंचमी 2026 कब है? जानिए 17 अगस्त के पूजा का शुभ मुहूर्त और समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 16 अगस्त 2026 को शाम 4 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी और अगले दिन 17 अगस्त 2026 को शाम 5:00 बजे तक विद्यमान रहेगी।

उदया तिथि के सर्वमान्य सिद्धांत के आधार पर नाग पंचमी का मुख्य पर्व 17 अगस्त 2026, सोमवार को ही पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

  • नाग पंचमी 2026 तिथि: 17 अगस्त 2026 (सोमवार)

  • पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह 05:51 बजे से सुबह 08:29 बजे तक

  • पूजा के लिए कुल समय: लगभग 2 घंटे 37 मिनट

Related Articles

Back to top button