हरियाणा में JBT शिक्षकों की TGT पदोन्नति प्रक्रिया तेज! 13 अगस्त तक मांगे आवेदन, DEEO पर गाज की तैयारी

चंडीगढ़ (हरियाणा): हरियाणा सरकार ने राज्य के प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत जेबीटी (JBT) शिक्षकों को टीजीटी (TGT) पदों पर पदोन्नत करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को “मोस्ट अर्जेंट” श्रेणी में आधिकारिक आदेश जारी करते हुए सभी पात्र शिक्षकों के आवेदन और सेवा अभिलेख 13 अगस्त तक अनिवार्य रूप से भेजने के सख्त निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा का हर हाल में सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
📜 समय बीतने के बाद मिले थे कई मामले, पदोन्नति से वंचित शिक्षकों को मिला अंतिम अवसर
शिक्षा विभाग के अनुसार, हाल ही में विभिन्न विषयों के अंतर्गत जेबीटी (JBT) और सीएंडवी (C&V) शिक्षकों को टीजीटी (TGT) पदों पर पदोन्नति प्रदान की गई थी।
हालांकि, प्रक्रिया के दौरान कई पात्र शिक्षकों के दस्तावेज और पदोन्नति मामले निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद प्राप्त हुए थे। ऐसे छूटे हुए पात्र शिक्षकों को अब अंतिम अवसर दिया जा रहा है, ताकि वे अपनी वरिष्ठता (Seniority) और योग्यता के आधार पर पदोन्नति का अपना न्यायसंगत दावा प्रस्तुत कर सकें।
📁 13 अगस्त तक हार्ड व सॉफ्ट कॉपी भेजना अनिवार्य, ये दस्तावेज संलग्न करना होगा जरूरी
निदेशालय के जारी निर्देशों के अनुसार, सभी पात्र शिक्षकों के प्रमोशन केस 13 अगस्त तक हार्ड कॉपी (Hard Copy) और सॉफ्ट कॉपी (Soft Copy) दोनों ही माध्यमों से मुख्यालय भेजने होंगे।
भेजे जाने वाले प्रस्तावों के साथ शिक्षकों के सभी आवश्यक शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अद्यतन (Updated) एसीआर, विशेष एसीआर, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तथा विधिवत भरी हुई समरी शीट संलग्न करना अनिवार्य किया गया है।
⚠️ देरी होने पर गाज गिरना तय, संबंधित जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (DEEO) होंगे व्यक्तिगत जिम्मेदार
शिक्षा विभाग ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को चेतावनी देते हुए रुख बेहद सख्त कर लिया है।
विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी पात्र शिक्षक का मामला समय पर मुख्यालय नहीं भेजा जाता और वह पदोन्नति से वंचित रह जाता है, अथवा भविष्य में इस कारण कोई कानूनी विवाद उत्पन्न होता है, तो उसकी पूरी और सीधी जिम्मेदारी संबंधित जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (DEEO) की होगी। ऐसे मामलों में लापरवाही के लिए संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से कानूनी व प्रशासनिक रूप से जवाबदेह माना जाएगा।






