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उत्तरप्रदेश

सावन 2026 के पहले सोमवार पर पूरे देश में भक्ति का माहौल, इन 5 प्रसिद्ध धामों में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

नई दिल्ली: सावन का पहला सोमवार आज संपूर्ण देश में असीम आस्था, श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। सावन मास के सोमवार के दिन देवाधिदेव महादेव की विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का अत्यंत विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यही वजह है कि इस पूरे पावन माह में देश के सुप्रसिद्ध शिवालयों में श्रद्धालुओं एवं कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ती है। वर्ष 2026 में सावन का यह पवित्र महीना 30 जुलाई से प्रारंभ होकर 28 अगस्त तक चलेगा। वैसे तो देश में भगवान शिव के अनेक पावन मंदिर हैं, किंतु 5 प्रमुख धाम ऐसे हैं जो सावन के दौरान शिव भक्तों की सबसे पसंदीदा मंजिलों में शीर्ष पर गिने जाते हैं।

🔱 1. बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर, झारखंड): कांवड़ियों की सबसे पहली और पसंदीदा मंजिल

सावन के महीने में सबसे अधिक कांवड़ियों की भीड़ जिन धार्मिक स्थलों पर दृष्टिगोचर होती है, उनमें झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम का नाम सबसे ऊपर आता है।

सावन मास में देश के कोने-कोने से लाखों कांवड़िए बिहार के सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर लगभग 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करते हुए देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में से एक इस धाम में हर सोमवार को 2 से 3 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन-पूजन करते हैं।

🛕 2. काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश): बाबा विश्वनाथ की नगरी में उमड़ती है अपार संगत

मोक्षदायिनी काशी (वाराणसी) में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर देश के सबसे प्राचीन एवं पूजनीय शिव मंदिरों में से एक है।

सावन के महीने में भगवान शिव के दिव्य दर्शन और गंगाजल से जलाभिषेक करने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी नगरी भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी है और यहां बाबा विश्वनाथ स्वयं साक्षात विराजमान हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को मंदिर के गंगा द्वार और गर्भगृह के आसपास श्रद्धालुओं की कई किलोमीटर लंबी कतारें दिखाई देती हैं।

🔮 3. महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन, मध्य प्रदेश): बाबा महाकाल की भस्म आरती और विशेष सवारी का आकर्षण

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर भी सावन में शिव भक्तों की पहली पसंद में शामिल रहता है।

12 ज्योतिर्लिंगों में से एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग होने के कारण महाकाल की महिमा अपरंपार है। महाकाल को कालों के काल यानी मृत्यु पर विजय प्राप्त कराने वाले शिव के रूप में पूजा जाता है। यहां की विश्वप्रसिद्ध ‘भस्म आरती’ और सावन के सोमवार पर निकलने वाली ‘बाबा महाकाल की शाही सवारी’ के अलौकिक दर्शन करने हेतु उज्जैन नगरी में भक्तों का तांता लगा रहता है।

🌿 4. नीलकंठ महादेव मंदिर (ऋषिकेश, उत्तराखंड): नीलकंठ पर्वत पर सजता है कांवड़ियों का मेला

उत्तराखंड के ऋषिकेश से लगभग 30 किलोमीटर दूर पौड़ी गढ़वाल की पहाड़ियों में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर कांवड़ यात्रा का एक प्रमुख केंद्र है।

हरिद्वार और ऋषिकेश से पवित्र गंगाजल लेकर भारी संख्या में कांवड़िए नीलकंठ महादेव के जलाभिषेक हेतु पैदल चढ़ाई पूरी करते हैं। पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का पान करने के उपरांत भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया था, जिसके बाद वे इसी स्थान पर विश्राम हेतु विराजे थे।

🌊 5. सोमनाथ मंदिर (प्रभास पाटन, गुजरात): प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन को उमड़ते हैं श्रद्धालु

गुजरात के प्रभास पाटन क्षेत्र में अरब सागर के तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में ‘प्रथम ज्योतिर्लिंग’ होने का गौरव प्राप्त है।

सावन के महीने में सोमनाथ मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण अत्यंत भव्य और मनमोहक हो जाता है। यद्यपि यहां उत्तर भारत की भांति पारंपरिक कांवड़ यात्रा की भीड़ नहीं होती, किंतु ज्योतिर्लिंग के पावन दर्शन और समुद्र तट पर महादेव की महाआरती में सम्मिलित होने के लिए रोजाना हजारों-लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

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