FSSAI के कड़े रुख के आगे झुकी पेप्सिको: स्टिंग की बोतलों और कैन से हटाया ‘Energy’ शब्द, जानें क्या है नया नियम

नई दिल्ली: खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI द्वारा ‘एनर्जी ड्रिंक्स’ (Energy Drinks) को एक अलग कैटेगरी के रूप में मान्यता समाप्त करने के फैसले के बाद पेप्सिको इंडिया (PepsiCo India) ने बड़ा कदम उठाया है।
कंपनी ने अपने लोकप्रिय उत्पाद ‘स्टिंग’ (Sting) के नए कैन और बोतलों के लेबल से ‘एनर्जी’ शब्द हटा दिया है। FSSAI की 90 दिनों की समयावधि (डेडलाइन) पूरी होने से पहले पेप्सिको ने यह बदलाव लागू कर दिया है, जबकि रेड बुल, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, मॉन्स्टर और हेल जैसी अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियां नियमों का अनुपालन करने के लिए सरकार से अतिरिक्त समय मांग रही हैं। पेप्सिको के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि कंपनी देश के सभी लागू नियमों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित कर रही है।
🏎️ फॉर्मूला वन (F1) स्पॉन्सरशिप विज्ञापनों में भी बदलाव, नए पैकेजिंग के साथ बाजार में आएगा स्टिंग
उद्योग जगत के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में स्टिंग के सभी नए कैन और बोतलें बिना ‘एनर्जी’ शब्द के निर्मित की जा रही हैं और उनका नया स्टॉक जल्द ही रिटेल काउंटरों पर उपलब्ध होगा।
इसके साथ ही पेप्सिको द्वारा स्टिंग के सभी विज्ञापनों को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। कंपनी ने पिछले वर्ष फॉर्मूला वन (Formula 1) के साथ 5 साल की ग्लोबल स्पॉन्सरशिप डील की थी, जिसके तहत स्टिंग को F1 का “ऑफिशियल एनर्जी ड्रिंक” घोषित किया गया था। अब टीवी कमर्शियल्स, ट्रैकसाइड बैनर्स और फैन जोन ब्रांडिंग से भी ‘एनर्जी’ शब्द को हटाकर विज्ञापनों को संशोधित किया जा रहा है।
🥤 ₹13,000 करोड़ का है भारतीय एनर्जी ड्रिंक मार्केट, FSSAI ने ‘शरीर को ऊर्जावान बनाने’ वाले दावों को बताया भ्रामक
भारत में एनर्जी ड्रिंक्स का बाजार लगभग ₹13,000 करोड़ से अधिक का अनुमानित है, जिस पर कंपनियां सालाना ₹2,000 करोड़ केवल मार्केटिंग पर खर्च करती हैं।
वर्ष 2017 में ₹20 की PET बोतल में लॉन्च होकर स्टिंग ने इस मार्केट में अपनी पैठ मजबूत की थी। हालांकि, अब FSSAI ने अनिवार्य कर दिया है कि वह एनर्जी ड्रिंक्स को एक अलग श्रेणी नहीं मानेगा। नियामक का तर्क है कि “शरीर और दिमाग को त्वरित ऊर्जावान बनाने” जैसे दावे उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं। इस नियम के कड़े क्रियान्वयन के कारण देश भर के डिस्ट्रीब्यूटर्स पुरानी पैकेजिंग वाला स्टॉक लेने से बच रहे हैं, जिससे रिटेल दुकानों पर इन ब्रांड्स की किल्लत देखने को मिल रही है।
📜 इंडियन बेवरेज एसोसिएशन (IBA) ने FSSAI को लिखा पत्र, कंपनियों ने भारी नुकसान का हवाला देकर मांगी मोहलत
कोका-कोला, पेप्सिको और रिलायंस जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधित्व वाले ‘इंडियन बेवरेज एसोसिएशन’ (IBA) ने FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रजित पुन्हानी को पत्र लिखकर बातचीत की मांग की है।
पेय पदार्थ निर्माताओं ने नियामक को अलग से पत्र भेजकर अवगत कराया है कि पूर्व में छप चुके लाखों कैन और बोतलों के नष्ट होने से कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान होगा। IBA की महासचिव गुनवीना चड्ढा ने कहा कि ये मानक कई वर्षों के विचार-विमर्श के बाद तय किए गए थे, इसलिए कंपनियों को स्टॉक क्लियर करने के लिए अतिरिक्त समय मिलना चाहिए।
📈 पेप्सिको इंडिया के राजस्व में 8% का उछाल, वरुण बेवरेजेस के जरिए मांग में बनी हुई है मजबूती
वित्तीय मोर्चे पर, पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स ने वर्ष 2025 के लिए अपने समेकित राजस्व (Consolidated Revenue) में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए ₹9,798 करोड़ की कमाई की है, जबकि कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) 4.5 प्रतिशत बढ़कर ₹905 करोड़ हो गया है।
ब्रोकरेज फर्म एमके सिक्योरिटीज के अनुसार, पेप्सिको के मुख्य बॉटलिंग पार्टनर ‘वरुण बेवरेजेस’ (Varun Beverages) को स्टिंग क्लासिक जैसे उत्पादों से भारतीय बाजार में बेहतरीन रिस्पांस मिल रहा है और मांग उम्मीद से कहीं बेहतर बनी हुई है।






