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उत्तरप्रदेश

आवारा कुत्तों व मवेशियों की समस्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: यूपी सरकार को 2 हफ्ते में व्यापक एक्शन प्लान बनाने का निर्देश

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों तथा छुट्टा मवेशियों की बढ़ती समस्या नागरिकों की सुरक्षा व जीवन के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। इनकी वजह से आए दिन होने वाले दर्दनाक सड़क हादसों को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वह आवारा मवेशियों व लावारिस कुत्तों की समस्या से निपटने हेतु दो सप्ताह की समयसीमा के भीतर एक व्यापक, प्रभावी और व्यावहारिक एक्शन प्लान तैयार करे, ताकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन हो सके।

📋 संस्थागत क्षेत्रों की निकायवार सूची तैयार करे सरकार, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह हो पालन

आम जनमानस की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को त्वरित कदम उठाने को कहा है।

अदालत ने निर्देश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दो सप्ताह के भीतर संपूर्ण प्रदेश में संस्थागत क्षेत्रों (Institutional Areas) को चिन्हित कर जिला और स्थानीय निकायवार प्रामाणिक सूची तैयार की जाए।

🏥 केवल औपचारिकता न निभाए सरकार, अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों को करें शामिल

जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान याचिका में जारी दिशानिर्देशों के अनुपालन के दौरान यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।

हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार केवल कागजी या औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रहे। कोर्ट ने आदेश दिया कि बनाई जाने वाली सूची में सरकारी व निजी शिक्षण संस्थान, अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, खेल परिसर तथा भारी भीड़भाड़ वाले अन्य सार्वजनिक स्थलों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

🐕 “उपयोग और सार्वजनिक महत्व के आधार पर घोषित हों संस्थागत क्षेत्र”, हाईकोर्ट की स्पष्ट हिदायत

माननीय हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थल को केवल उसके नाम के आधार पर नहीं, बल्कि उसके वास्तविक उपयोग, सार्वजनिक महत्व और वहां प्रतिदिन आने-जाने वाले नागरिकों की अनुमानित संख्या को ध्यान में रखकर ‘संस्थागत क्षेत्र’ घोषित किया जाए।

कोर्ट ने माना कि छुट्टा पशुओं की समस्या केवल नगर निकायों या पंचायतों तक सीमित दायरा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम जनता की सुरक्षा, सुचारू यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ अत्यंत गंभीर विषय बन चुका है।

🛣️ NHAI और यूपी सरकार से हाईवे के लिए मांगी कार्ययोजना, पार्कों में कुत्तों के प्रबंधन के निर्देश

समस्या के स्थायी समाधान के लिए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वित रणनीति बनाने को कहा है।

इसके साथ ही अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और यूपी सरकार से राष्ट्रीय राजमार्गों (Highways) पर लावारिस पशुओं की पहचान करने, उन्हें सुरक्षित गौशालाओं में पहुँचाने, उनके चारे व इलाज की व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत कार्ययोजना तलब की है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक पार्कों व खेल के मैदानों में आवारा कुत्तों के उचित प्रबंधन और नियंत्रण हेतु ठोस उपाय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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