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मध्यप्रदेश

कटनी CSP को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से झटका: एसपी द्वारा प्रभार वापस लेने के आदेश में कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार

जबलपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कटनी नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) का प्रभार एवं प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र वापस लिए जाने के चर्चित मामले पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कटनी में पदस्थ महिला सीएसपी द्वारा पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा अपने प्रभार और अधिकार क्षेत्र को वापस लेने संबंधी आदेशों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की शरण ली गई थी। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एसपी के आदेश में हस्तक्षेप करने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

⚖️ कटनी एसपी के दो प्रशासनिक आदेशों को सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने दी थी चुनौती

कटनी सीएसपी नेहा पच्चीसिया की ओर से दायर याचिका में कटनी पुलिस अधीक्षक द्वारा 16 सितंबर 2025 और 22 जुलाई 2026 को जारी किए गए प्रशासनिक आदेशों को चुनौती दी गई थी।

याचिका में तर्क दिया गया था कि बिना किसी कदाचार के आरोप या विभागीय जांच के उनका कार्यक्षेत्र मनमाने ढंग से घटा दिया गया है। उनसे कटनी शहर के सभी 5 थानों के पर्यवेक्षण और प्रभार की जिम्मेदारी वापस ले ली गई तथा उनके शासकीय वाहन चालक को भी निलंबित कर दिया गया।

🎖️ याचिका में बेदाग सेवा रिकॉर्ड का दावा, गुना और मंडला में किए उत्कृष्ट कार्यों का दिया हवाला

याचिकाकर्ता सीएसपी ने कोर्ट के समक्ष अपने बेदाग सेवा रिकॉर्ड (Service Record) और उत्कृष्ट कार्यशैली का हवाला दिया।

उन्होंने बताया कि पूर्व में गुना जिले में पदस्थापना के दौरान उन्होंने महिला पुलिस पहल और मोबाइल पुलिस थाना जैसी नवोन्मेषी कार्यप्रणालियां शुरू की थीं। इसके अतिरिक्त मंडला जिले में गोवंश एवं अवैध गोमांस तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने जैसे उल्लेखनीय कार्य किए। याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (अवसर की समता) का हवाला देते हुए एसपी के दोनों आदेशों को निरस्त कर पूर्व जिम्मेदारियां पुनस्थापित करने की प्रार्थना की गई थी।

🏛️ चालान में देरी और अवैध वसूली के आरोप, हाईकोर्ट ने माना आंतरिक प्रशासनिक मामला

याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार एवं पुलिस विभाग की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि कटनी सीएसपी पर हत्या जैसे गंभीर अपराध में समय-सीमा के भीतर चालान प्रस्तुत न करने का आरोप है।

इसके साथ ही, एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी से कथित अवैध वसूली की शिकायत पर भी उनके विरुद्ध विभागीय जांच प्रक्रियाधीन है। आरोपों की संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशासनिक हित में प्रभार वापस लेने के आदेश जारी किए गए थे। एकलपीठ ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के उपरांत इसे पुलिस विभाग का आंतरिक प्रशासनिक एवं कार्य-विभाजन से जुड़ा मामला करार दिया और याचिका खारिज कर दी।

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