शेयर बाजार की उथल-पुथल में FPIs का बड़ा धमाका: निफ्टी-सेंसेक्स को पछाड़कर कमाया 37% तक रिटर्न, जानिए स्मार्ट दांव

मुंबई (बिजनेस डेस्क): चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (जून तिमाही) के दौरान जब भारतीय इक्विटी बाजार भारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और वैश्विक ब्याज दरों में अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था, तब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के स्मार्ट दांव ने बाजार विशेषज्ञों को चकित कर दिया।
बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहने के बावजूद विदेशी फंड मैनेजर्स ने सही सेक्टर्स और चुनिंदा शेयरों का चयन कर न केवल बाजार की वोलाटिलिटी (अस्थिरता) को बेअसर किया, बल्कि प्रमुख सूचकांकों की तुलना में कहीं अधिक शानदार रिटर्न अर्जित किया।
📊 जून तिमाही में 75% बड़े FPIs की संपत्ति में 10 से 37 प्रतिशत तक का भारी उछाल: प्राइम डेटाबेस
‘प्राइम डेटाबेस’ (Prime Database) की एक विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही में शीर्ष 20 विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों में से कम से कम 75 प्रतिशत फंड्स के भारतीय पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू में 10 प्रतिशत से लेकर 37 प्रतिशत तक की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई।
यह वृद्धि इसी समान अवधि के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी द्वारा दिए गए रिटर्न की तुलना में काफी अधिक थी। जब वैश्विक संकटों के चलते कई निवेशक सतर्क रुख अपना रहे थे, उस समय गोल्डमैन सैक्स, कैपिटल ग्रुप और जीक्यूजी पार्टनर्स (GQG Partners) जैसे प्रमुख विदेशी फंड्स का भारतीय बाजार पर अटूट भरोसा सटीक साबित हुआ।
📈 ‘स्टॉक पिकर्स मार्केट’ बनकर उभरा भारत, ताइवान-कोरिया के मुकाबले मजबूत बुनियादी ढांचा
यद्यपि उस दौरान सेमीकंडक्टर और एआई बूम के चलते ताइवान और दक्षिण कोरियाई बाजारों में तकनीकी कंपनियों से भारी मुनाफा देखने को मिला था, तथापि कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और ग्लोबल शिपिंग दरों में वृद्धि के बावजूद भारतीय बाजार का लचीलापन अद्वितीय रहा।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारत स्टॉक चुनने वालों (Stock Pickers) के लिए एक आदर्श बाजार साबित हुआ है, जहाँ सही कंपनियों की पहचान कर पोर्टफोलियो का रिटर्न मुख्य सूचकांकों से कहीं आगे निकाला जा सकता है। फंड्स की वैल्यू में यह इजाफा शेयरों के भाव बढ़ने और नए रणनीतिक निवेश दोनों का संयुक्त परिणाम है।
💡 लार्ज-कैप में बिकवाली, मिड-कैप और न्यू-एज बिजनेस ने दिखाई जबरदस्त तेजी: विशेषज्ञ राय
बे कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर और सीआईओ (CIO) केयूर मजूमदार के अनुसार, हालिया समय में विदेशी बिकवाली का मुख्य दबाव सूचकांक में अधिक वेटेज रखने वाले लार्ज-कैप शेयरों, विशेषकर निजी बैंकों और आईटी कंपनियों पर केंद्रित रहा।
इसके विपरीत, मिड-कैप, स्मॉल-कैप और नए जमाने के डिजिटल व कंज्यूमर बिजनेस ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। जिन विदेशी फंड्स ने ब्रॉडर मार्केट (व्यापक बाजार) में भविष्योन्मुखी शेयरों की पहचान की, उन्हें अप्रत्याशित मुनाफा हुआ। इस दौड़ में कैपिटल ग्रुप, फिडेलिटी, आईएफसी इमर्जिंग एशिया फंड, गोल्डमैन सैक्स, इंटरनेशनल अपॉर्च्युनिटीज फंड, नालंदा और आईएनक्यू होल्डिंग्स जैसे संस्थान अग्रणी रहे।
📉 सूचकांकों का तुलनात्मक प्रदर्शन: ब्रॉडर मार्केट में मिडकैप 17% और स्मॉलकैप 24.5% उछला
तिमाही के आधिकारिक प्रदर्शन आंकड़ों के अनुसार:
-
सेंसेक्स और निफ्टी: समीक्षाधीन तिमाही में बीएसई सेंसेक्स में लगभग 6.3% और एनएसई निफ्टी में 6.8% की बढ़त दर्ज हुई।
-
ब्रॉडर मार्केट (भारत): बीएसई मिड-कैप 150 में 17% तथा बीएसई स्मॉल-कैप 250 सूचकांक में 24.5% की भारी तेजी दर्ज की गई।
-
वैश्विक इमर्जिंग मार्केट्स: डॉलर के संदर्भ में चीन 22.2%, ताइवान 46.3% और दक्षिण कोरिया 64.24% बढ़ा, जबकि संपूर्ण एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स (MSCI Emerging Markets Index) में 23% की तेजी आई।
हालाँकि, बाद के महीनों में पूर्वी एशियाई बाजारों में एआई ट्रेड में ठहराव के चलते गिरावट देखी गई, जबकि भारतीय बाजार अपनी घरेलू विकास दर के दम पर मजबूती से टिका हुआ है।






