दिल्ली पेलेट गन मामले में पहली FIR दर्ज: राहुल गांधी के 8 घंटे धरने के बाद BNS 118 व 125 में केस

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को 20 वर्षीय छात्र साहिल लोचब के मामले में औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है, जो कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के छर्रे लगने से गंभीर रूप से घायल हुआ था।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पर करीब 8 घंटे चले धरने और विरोध के बाद यह कार्रवाई की गई। प्राथमिकी में किसी व्यक्ति विशेष को नामजद न करते हुए अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 118 और धारा 125 के तहत केस दर्ज कर आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी है।
⚖️ BNS की धारा 118 और 125: जानें किन धाराओं में कितनी सजा का है प्रावधान
प्राथमिकी में लगाई गई धाराओं और उनके कानूनी दंड का विवरण:
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धारा 118 BNS (खतरनाक हथियारों से गंभीर चोट): यह धारा खतरनाक हथियारों या साधनों के जरिए स्वेच्छा से चोट या गंभीर चोट पहुंचाने के अपराध से संबंधित है।
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सजा का प्रावधान: सामान्य चोट पहुंचाने पर 3 वर्ष तक की कैद या 20,000 रुपये तक जुर्माना (या दोनों); गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में 1 वर्ष से 10 वर्ष तक की कैद व जुर्माना, और अत्यधिक गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक हो सकता है।
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धारा 125 BNS (जीवन व सुरक्षा को खतरे में डालना): यह धारा दूसरों की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को संकट में डालने वाले कृत्यों पर लागू होती है।
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सजा का प्रावधान: सामान्य उल्लंघन पर 3 महीने तक की कैद या 2,500 रुपये तक जुर्माना; चोट लगने पर 6 महीने तक की कैद या 5,000 रुपये जुर्माना; तथा गंभीर चोट की स्थिति में 3 वर्ष तक की कैद और 10,000 रुपये तक के जुर्माने का नियम है।
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📄 संसद मार्ग थाने में दर्ज FIR No: 0085, पीड़ित ने बताई अपनी पहचान
शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि और दर्ज प्राथमिकी का ब्योरा:
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प्राथमिकी का विवरण: संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR No: 0085 में कनॉट प्लेस क्षेत्र के पास पेलेट लगने से दाहिनी आंख की रोशनी चले जाने की शिकायत और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रार्थना की गई है।
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पारिवारिक पृष्ठभूमि: पीड़ित छात्र साहिल लोचब (उम्र करीब 20 वर्ष, पुत्र दीपक, निवासी मकान नं. 5, अग्रवाल कॉलोनी, न्यू अनाज मंडी, नजफगढ़, दिल्ली) दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) का छात्र है।
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पारिवारिक स्थिति: साहिल अपने परिवार का सबसे बड़ा बेटा है और उसके पिता दिव्यांग हैं। शिकायत में उसने स्पष्ट किया है कि उसका पूर्व में कभी किसी थाने या आपराधिक मुकदमे से कोई संबंध नहीं रहा है।
🚩 20 जुलाई का घटनाक्रम: जंतर-मंतर मार्च, लाठीचार्ज और नीली पोशाक वाले से चली पेलेट गन
घटना के दिन का क्रमवार विवरण:
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प्रदर्शन में भागीदारी: 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में छात्रों का बड़ा प्रदर्शन था, जहां से संसद की ओर मार्च निकाला जा रहा था।
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लाठीचार्ज और भगदड़: दोपहर के समय पुलिसिया लाठीचार्ज और आंसू गैस छोड़े जाने के बाद भगदड़ मची, जिसके बाद साहिल युवाओं की भीड़ के साथ तिरंगा हाथ में लेकर पालिका कनॉट प्लेस एरिया की तरफ बढ़ा।
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पेलेट लगने की घटना: इसी दौरान मुड़ते समय उसे शरीर के दाहिने हिस्से, छाती, बाजू और आंख के पास तेज धमाका महसूस हुआ। साहिल के अनुसार, नीली पोशाक पहने एक व्यक्ति के हाथ में बड़ी बंदूक थी, जिससे 5 से 6 बार धातु के पेलेट चलाए गए।
🏥 शरीर में 200 से ज्यादा छर्रे, AIIMS में सर्जरी के बाद रोशनी लौटने की उम्मीद 1% से कम
मेडिकल स्थिति, अस्पताल रेफरल और डॉक्टर की रिपोर्ट:
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अस्पतालों की श्रृंखला: घायल होने के बाद साथी छात्र उसे लेडी हार्डिंग अस्पताल ले गए, जहां से पहली एमएलसी (MLC) के बाद सफदरजंग और फिर AIIMS के आरपीसी आई सेंटर व AIIMS ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
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आंख का ऑपरेशन: 22 जुलाई 2026 को उसकी दाहिनी आंख का पहला ऑपरेशन हुआ। डॉक्टर की आधिकारिक एमएलसी रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि आंख की रोशनी वापस लौटने की संभावना 1 प्रतिशत से भी कम है।
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शरीर में फंसे छर्रे: सीटी स्कैन में सामने आया कि उसके शरीर (आंख के पीछे, जबड़े, गर्दन, बाजू और दिल के नजदीक) में 200 से अधिक छर्रे मौजूद हैं। डॉक्टरों के अनुसार नस के बेहद करीब होने के कारण आंख और दिल के पास फंसे छर्रों को निकाला नहीं जा सकता।
📹 सीसीटीवी, ड्रोन फुटेज और निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित की ओर से साक्ष्य सुरक्षित करने की अपील:
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फुटेज सुरक्षित करने की मांग: साहिल ने 20 जुलाई के जंतर-मंतर, संसद मार्ग, पटेल चौक, कनॉट प्लेस, राजीव चौक मेट्रो और ट्रैफिक पुलिस के सीसीटीवी कैमरों व ड्रोन फुटेज को सुरक्षित करने की मांग की।
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साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच: ऑपरेशन के दौरान निकाले गए धातु के छर्रों, सभी अस्पतालों की एमएलसी और मेडिकल रिकॉर्ड को आधिकारिक जांच में शामिल करने का अनुरोध किया गया।
🎙️ ‘इंसाफ की दिशा में यह पहला कदम’: FIR दर्ज होने के बाद बोले राहुल गांधी
धरना समाप्ति के बाद राहुल गांधी का बयान:
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न्याय की पहली सीढ़ी: प्राथमिकी दर्ज होने के उपरांत राहुल गांधी ने मीडिया से कहा कि यह इंसाफ की दिशा में पहला कदम है। घटना के एक महीने बाद भारी दबाव में केस दर्ज किया गया है।
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सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल: उन्होंने कहा कि देश की राजधानी के केंद्र में स्थित पुलिस स्टेशन में एक आम नागरिक को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए 8 घंटे तक संघर्ष करना पड़ा, जो प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।






