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दिल्ली/NCR

रात में मोबाइल स्क्रीन से मेलाटोनिन पर बुरा असर: डॉक्टर से समझें सोने से पहले स्क्रीन टाइम घटाने का सही तरीका

नई दिल्ली: आज के डिजिटल दौर में खराब नींद, दिनभर सुस्ती व थकान, सिरदर्द और आंखों में दर्द या लगातार चुभन की समस्या आम होती जा रही है। दिमाग और आंखों पर पड़ने वाले इस नकारात्मक प्रभाव का सबसे बड़ा कारण देर रात तक स्मार्टफोन का अत्यधिक इस्तेमाल और लगातार रील्स देखना है। अंधेरे कमरे में लेटकर मोबाइल से निकलने वाली हानिकारक नीली रोशनी (Blue Light) आंखों के साथ-साथ हमारी जैविक घड़ी को भी असंतुलित कर देती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन से दूरी बनाने की सलाह देते हैं।

🩺 एक्सपर्ट की राय: मेलाटोनिन हार्मोन और सर्केडियन रिदम पर असर

डॉक्टर का वैज्ञानिक विश्लेषण:

  • प्राकृतिक तैयारी का समय: डॉक्टर अमित कुमार मंडल (सीनियर डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी, पारस हेल्थ हॉस्पिटल) के अनुसार, सोने से कम से कम 60 मिनट पहले फोन बंद करने से मस्तिष्क और शरीर को प्राकृतिक रूप से विश्राम की अवस्था में जाने का अवसर मिलता है।

  • सर्केडियन रिदम: हमारे सोने और जागने की प्राकृतिक प्रक्रिया शरीर के आंतरिक चक्र यानी ‘सर्केडियन रिदम’ (Circadian Rhythm) द्वारा संचालित होती है।

  • मेलाटोनिन हार्मोन में बाधा: मोबाइल और टैबलेट की ब्लू लाइट मस्तिष्क में मेलाटोनिन (स्लीप हार्मोन) के स्राव को रोकती है। जब स्क्रीन बंद होती है, तभी मेलाटोनिन शरीर को यह संकेत भेज पाता है कि अब सोने और रिकवरी का समय हो चुका है।

🧠 सोशल मीडिया और लगातार नोटिफिकेशन: दिमाग को सोने नहीं देता स्क्रीन टाइम

नींद के पैटर्न पर पड़ने वाले प्रभाव:

  • दिमाग का अत्यधिक सक्रिय रहना: मोबाइल पर देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, समाचार पढ़ना, वीडियो देखना या ऑफिस के संदेशों का उत्तर देना दिमाग को अलर्ट मोड पर रखता है।

  • सोने के समय में देरी: अक्सर लोग कुछ मिनट के लिए फोन हाथ में लेते हैं, किंतु लगातार नोटिफिकेशन और वीडियोज के चलते सोने का समय घंटों आगे बढ़ जाता है।

  • नींद की अवधि में कमी: इससे न केवल गहरी नींद (Deep Sleep) की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि नींद के कुल घंटों में भी भारी कमी आ जाती है।

📖 फोन छोड़कर अपनाएं किताबें और ध्यान: बेहतर नींद के लिए बनाएं स्वस्थ दिनचर्या

स्वस्थ आदतें और समाधान:

  • सकारात्मक विकल्प: सोने से एक घंटा पहले फोन को कमरे से दूर रखें और उसकी जगह शांत माहौल में कोई अच्छी किताब पढ़ें, हल्की स्ट्रेचिंग करें, ध्यान (Meditation) लगाएं या परिवार के साथ बातचीत करें।

  • नियमित दिनचर्या: केवल स्क्रीन बंद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करना भी बेहद आवश्यक है।

  • दिनभर ऊर्जा का स्तर: रात की निर्बाध और गहरी नींद अगले दिन कार्यक्षमता, मानसिक सतर्कता और ऊर्जा के स्तर को कई गुना बढ़ा देती है।

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