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बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले VHP के सुझावों पर विवाद: पारंपरिक धार्मिक स्वरूप बनाए रखने पर जोर

कोलकाता (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल में आगामी दुर्गा पूजा उत्सव से पहले विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा जारी किए गए कुछ दिशा-निर्देशों और सुझावों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

VHP की पश्चिम बंगाल शाखा ने दुर्गा पूजा के आयोजन को लेकर पारंपरिक और शास्त्रसम्मत धार्मिक स्वरूप को यथावत बनाए रखने की जोरदार वकालत की है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि पूजा समितियों द्वारा पंडाल के बाहरी ढांचे में विभिन्न थीम अपनाई जा सकती हैं, परंतु मुख्य वेदी पर स्थापित होने वाली मां दुर्गा की दिव्य प्रतिमा के पारंपरिक स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार का प्रयोग या फेरबदल स्वीकार्य नहीं होगा।

संगठन के बंगाल प्रचारक रक्तिम दास ने कहा कि मां दुर्गा को शास्त्रों और सनातन परंपराओं के अनुरूप ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए। सजावट में विविधता से कोई आपत्ति नहीं है, किंतु आराध्य प्रतिमा के पारंपरिक स्वरूप में मनमाने बदलाव नहीं होने चाहिए।

🎨 थीम आधारित मूर्तियों पर VHP का रुख: ‘दस भुजाओं वाला पारंपरिक स्वरूप ही हो’

परंपरा और कला के बीच संतुलन पर संगठन का मत:

  • आध्यात्मिक भावना का संरक्षण: VHP से जुड़े स्वामी निर्गुणानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि संगठन सामान्य तौर पर थीम आधारित कला का विरोधी नहीं है, लेकिन सनातनी परंपरा में पूजा, महास्नान, बलिदान और हवन जैसे अनुष्ठान महापूजा के अभिन्न अंग हैं।

  • पारंपरिक स्वरूप की रक्षा: उन्होंने जोर देकर कहा कि मां दुर्गा को उनकी मूल दस भुजाओं, पारंपरिक वेशभूषा, आयुधों और ममतामयी स्वरूप में ही दिखाया जाना चाहिए।

  • अनुचित बदलावों पर आपत्ति: ऐसे आधुनिक या समकालीन विषयों पर आपत्ति जताई गई है जो पूजा के मूल आध्यात्मिक भाव और धार्मिक मर्यादा के विपरीत हों।

🍲 मंडप के अंदर मांसाहारी भोजन पर रोक और पवित्रता बनाए रखने का सुझाव

खान-पान और परिसर की मर्यादा को लेकर दिशानिर्देश:

  • मंडप के भीतर नॉन-वेज पर रोक: VHP ने पूजा मंडप की धार्मिक शुचिता बनाए रखने के लिए मांग की है कि मुख्य मंडप के अंदर मांसाहारी भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए।

  • आसपास बिक्री पर नियंत्रण: संगठन ने पंडालों के मुख्य परिसर के आसपास मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने और खाने के इच्छुक लोगों के लिए मुख्य परिसर से दूर अलग व्यवस्था करने का सुझाव दिया है।

  • परंपरागत भोग पर स्पष्टीकरण: स्वामी निर्गुणानंद ब्रह्मचारी ने स्पष्ट किया कि संगठन द्वारा शास्त्रसम्मत मांसाहारी भोग अथवा बलि प्रथा के संदर्भ में कोई प्रश्न नहीं उठाया गया है, बल्कि यह निर्देश आम खान-पान और स्टॉल्स की मर्यादा को लेकर है।

👥 ‘धर्म व्यक्तिगत, त्योहार सार्वभौमिक’ धारणा का विरोध: सामाजिक भागीदारी पर सवाल

उत्सव की प्रकृति को लेकर उपजा विवाद:

  • सामुदायिक धार्मिक अनुष्ठान: VHP का कहना है कि दुर्गा पूजा को मूल रूप से एक पवित्र धार्मिक अनुष्ठान के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि मात्र एक ऐसा सार्वभौमिक मेला जिसमें औपचारिकता के लिए हर वर्ग की भागीदारी तय की जाए।

  • बंगाल की सांस्कृतिक पहचान: इस सुझाव पर सर्वाधिक विवाद इसलिए हो रहा है क्योंकि बंगाल में दुर्गा पूजा दशकों से धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ एक सर्वसमावेशी सामाजिक और सांस्कृतिक महाकुंभ रही है।

  • जनसमर्थन से विरोध की चेतावनी: VHP ने आगाह किया है कि यदि पूजा समितियां निर्धारित धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन करेंगी, तो संगठन स्थानीय नागरिकों की सहमति लेकर ऐसे आयोजनों के विरोध की रणनीति बनाएगा।

💼 थीम पूजा से जुड़ा व्यापक अर्थतंत्र: कलाकारों व आयोजकों में चर्चा तेज

सांस्कृतिक उद्योग और आजीविका पर प्रभाव:

  • विशाल कारोबार: बंगाल में थीम आधारित दुर्गा पूजा केवल कला नहीं बल्कि एक विशाल अर्थव्यवस्था है, जिसमें हजारों मूर्तिकार, लाइट डिजाइनर, बांस-कपड़ा कारीगर और स्थानीय व्यापारी साल भर की आजीविका कमाते हैं।

  • आयोजकों की चिंता: VHP के इन सुझावों के बाद पूजा आयोजकों और समकालीन कलाकारों के बीच बहस छिड़ गई है कि क्या इन बंदिशों से बंगाल की विश्वप्रसिद्ध थीम पूजा और कलात्मक नवाचारों पर असर पड़ेगा।

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