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महाराष्ट्र

मुंबई में सीढ़ियों पर साइकिल खड़ी करने पर 15 लाख का जुर्माना: बॉम्बे हाई कोर्ट ने रद्द किया फैसला, सोसाइटी को लगाई फटकार

मुंबई (महाराष्ट्र): मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में हाउसिंग सोसाइटियों और फ्लैट धारकों के बीच मेंटेनेंस तथा नियमों को लेकर विवाद लगातार अदालतों तक पहुंच रहे हैं।

हाल ही में मुंबई की एक हाउसिंग सोसाइटी द्वारा सीढ़ियों की खुली जगह में साइकिल पार्क करने पर फ्लैट मालिकों पर ₹15.45 लाख से अधिक का भारी-भरकम जुर्माना लगाने का अजीबोगरीब मामला सामने आया। इस विवाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सोसाइटी के मनमाने फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया और संबंधित सदस्यों को बड़ी राहत प्रदान की।

🚴 11 साल तक साइकिल रखने पर लगाया था ₹15.45 लाख जुर्माना: उप-पंजीयक ने भी रखा था बरकरार

मामले की पृष्ठभूमि और जुर्माने का विवरण:

  • लंबे समय से साइकिल पार्किंग: धनलक्ष्मी सहकारी आवास समिति (Dhanlaxmi Co-operative Housing Society) की सदस्य योगिनी और सेजल द्वारा इमारत की सीढ़ियों के पास खुली जगह में करीब 11 वर्षों तक साइकिल खड़ी की गई थी।

  • विशालकाय जुर्माना: सोसाइटी प्रबंधन ने दोनों सदस्यों पर कुल ₹15,45,730 का असामान्य जुर्माना लगा दिया।

  • वसूली प्रमाण पत्र: सोसाइटी ने वसूली के लिए सहकारी उप-पंजीयक (Deputy Registrar) के समक्ष आवेदन किया, जहां से 4 अप्रैल 2025 को वसूली प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। पुनर्विचार के बाद मामले को दोबारा उप-पंजीयक को भेजा गया, जिसके खिलाफ फ्लैट मालिकों ने अधिवक्ताओं के जरिए उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की।

⚖️ ‘नियमों का दुरुपयोग नहीं कर सकती समिति’: हाई कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार

अदालत की तल्ख टिप्पणियां और निष्कर्ष:

  • तर्कसंगतता और विवेक की आवश्यकता: बॉम्बे हाई कोर्ट ने समिति के मनमाने और तानाशाही रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी कार्रवाई में विवेक और तर्कसंगतता का होना अनिवार्य है।

  • उपनियम 169(A) का दुरुपयोग: अदालत ने स्पष्ट किया कि मॉडल उपनियम (Model Bye-laws) संख्या 169(ए) का दुरुपयोग कर छोटे-मोटे मामलों में 11 वर्षों की संचयी अवधि मानकर ऐसा अनुचित जुर्माना नहीं थोपा जा सकता।

  • सर्वोच्च प्राधिकरण नहीं है सोसाइटी: कोर्ट ने टिप्पणी की कि सोसाइटी प्रबंधन स्वयं को कानून से ऊपर या सर्वोच्च नियामक प्राधिकरण नहीं समझ सकता।

🛑 ‘तुरंत आपत्ति दर्ज कर हटाना था साइकिल’: कोर्ट ने प्रक्रियागत खामियों को किया उजागर

विधिक प्रक्रिया पर कोर्ट का निर्देश:

  • समय पर आपत्ति दर्ज न करना: अदालत ने रेखांकित किया कि यदि सीढ़ियों पर साइकिल खड़ी होने से कोई असुविधा थी, तो सोसाइटी को उसी समय आपत्ति दर्ज कर उसे तत्काल हटाने का नोटिस व निर्देश देना चाहिए था।

  • 11 साल बाद भारी जुर्माना अनुचित: वर्षों तक चुप रहने के बाद अचानक 11 साल का हिसाब लगाकर लाखों रुपये का जुर्माना वसूलना कानूनन गलत है। अदालत ने सोसाइटी को फटकार लगाते हुए पीड़ित सदस्यों के पक्ष में फैसला सुनाया।

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