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उत्तरप्रदेश

सैन्य अफसर संभालेंगे राम मंदिर का मैनेजमेंट: रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने CEO; वित्तीय, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था की मिली जिम्मेदारी

अयोध्या (उत्तर प्रदेश): अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का प्रबंधन और व्यवस्थाएं अब सिर्फ निर्माण कार्यों व सामान्य दर्शन तक सीमित नहीं रहेंगी। परिसर में निरंतर बढ़ रहे श्रद्धालुओं के आवागमन, व्यापक सुरक्षा प्रबंधन, बड़े धार्मिक अनुष्ठानों, वित्तीय पारदर्शिता और आगामी दीर्घकालिक योजनाओं को ध्यान में रखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने संगठनात्मक ढांचे का पेशेवर पुनर्गठन किया है। ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है, वहीं गोविंद देव गिरी जी महाराज को महामंत्री का कार्यभार सौंपा गया है। वेस्टर्न एयर कमांड संभाल चुके जितेंद्र मिश्रा अब सैन्य पृष्ठभूमि के अपने विशाल प्रशासनिक अनुभव से मंदिर की व्यवस्थाओं को हाई-टेक व व्यवस्थित रूप देंगे।

⚖️ CEO और महामंत्री के अधिकारों में क्या फर्क होगा? रिपोर्टिंग ढांचा हुआ तय

दोनों शीर्ष पदों की भूमिका और कार्यक्षेत्र:

  • महामंत्री का दायरा: ट्रस्ट के शीर्ष नीतिगत निर्णयों, व्यापक रणनीतिक दिशा तय करने और संस्थागत कार्यों की सर्वोच्च निगरानी की भूमिका निभाएंगे।

  • CEO की कार्यकारी भूमिका: ट्रस्ट बोर्ड व महामंत्री द्वारा लिए गए नीतिगत फैसलों को धरातल पर क्रियान्वित कराने और रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों को संभालने का जिम्मा CEO का होगा।

  • सीधी रिपोर्टिंग: प्रशासनिक पदानुक्रम के तहत नवनियुक्त CEO सीधे ट्रस्ट के महामंत्री को रिपोर्ट करेंगे और उनके दिशा-निर्देशन में कार्य करेंगे।

📋 CEO के पास होंगी ये प्रमुख जिम्मेदारियां: वैधानिक, वित्तीय और सुरक्षा का दायरा

नोटिफिकेशन के आधार पर निर्धारित जिम्मेदारियां:

  • प्रशासनिक व वित्तीय प्रबंधन: ट्रस्ट की समस्त वैधानिक प्रक्रियाओं, वित्तीय लेन-देन, ऑडिट, संपत्ति प्रबंधन, कार्मिकों की नियुक्ति और नियम-कायदों को पारदर्शी बनाना।

  • रोजमर्रा का संचालन: नियमित पूजा-अर्चना, विशेष धार्मिक उत्सवों, दर्शन चक्र और व्यवस्थाओं को तय परंपराओं के अनुरूप निर्बाध चलाना।

  • श्रद्धालुओं की सुविधाएं: देश-विदेश से आने वाले लाखों रामभक्तों की सुगम दर्शन व्यवस्था, ठहरने, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और वीआईपी/संतों के प्रोटोकॉल का समन्वय करना।

  • मजबूत सुरक्षा तंत्र: स्थानीय पुलिस, राज्य सरकार और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर परिसर की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना।

📜 CEO पद के लिए तय की गई थीं कड़ी शर्तें: 3 साल का होगा कार्यकाल

चयन प्रक्रिया और आवश्यक योग्यताएं:

  • शैक्षणिक व अनुभव मानदंड: कम से कम स्नातक उपाधि, 50 से 70 वर्ष की आयु सीमा और किसी बड़े कॉर्पोरेट या सरकारी उपक्रम में 20 वर्ष से अधिक का शीर्ष प्रबंधन अनुभव अनिवार्य रखा गया था।

  • वेतनमान व्यवस्था: ट्रस्ट के पदाधिकारियों के मानद सेवा मॉडल से इतर, पहली बार पेशेवर CEO पद के लिए पारस्परिक सहमति से पारिश्रमिक (वेतन) व अन्य भत्ते तय किए गए हैं।

  • कार्यकाल विस्तार: आरंभिक कार्यकाल 3 वर्षों का निर्धारित है, जिसे उत्कृष्ट प्रदर्शन और समीक्षा के आधार पर आगे भी बढ़ाया जा सकेगा।

🤝 ट्रस्ट में 3 नए ट्रस्टियों का हुआ समावेश: संचालन व्यवस्था हुई और मजबूत

ट्रस्ट बोर्ड का विस्तार और स्वरूप:

  • नए ट्रस्टी शामिल: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अयोध्या के मदन मोहन, नई दिल्ली के महेश भागचंदा और शिकोहाबाद की निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में सम्मिलित किया गया है।

  • स्वायत्त ढांचा: उच्चतम न्यायालय के आदेश पर फरवरी 2020 में गठित इस स्वायत्त ट्रस्ट में पदेन सरकारी प्रतिनिधि केवल प्रशासनिक व वित्तीय समन्वय के लिए जुड़े हैं, जबकि निर्णयों का पूर्ण अधिकार स्थायी सदस्यों के पास सुरक्षित रहता है।

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